सुप्त वज्रासन for diabetes

सुप्त वज्रासन करने की विधि

  • सबसे पहले आप वज्रासन में बैठ जाएं।
  • कोहनियों का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और कोहनियों को जमीन पर टिका दें।
  • हाथों को धीरे-धीरे सीधे फैलाएं और सिर के पीछे की ओर ले जाएं
  • अब कंधों को जमीन पर टिकाते हुए एवं घुटनों को एक साथ रखते हुए पीठ के बल लेट जाएं।
  • हाथों को कैंची की आकृति बनाते हुए कंधों के नीचे लेकर आएं।
  • धीरे धीरे सांस लें फिर धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • अपने हिसाब से इस अवस्था को बनाएं रखें।
  • फिर धीरे धीरे अपने आरंभिक अवस्था आ जाएं।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र कर सकते हैं।

 
सुप्त वज्रासन के लाभ
वैसे इस आसन के बहुत सारे लाभ है लेकिन यहां पर इसके कुछ महत्वपूर्ण लाभ के बारे में बताया गया है।

  • सुप्त वज्रासन योग कब्ज के लिए: इस आसन के अभ्यास से आप कब्ज पर कण्ट्रोल पा सकते हैं।
  • सुप्त वज्रासन योग पेट के पेशियों के लिए: अगर आप अपने ढीला ढाला पेट की मांसपेशियों से निजात पाना चाहते हैं तो इस आसन का अभ्यास करना चाहिए। यही नहीं यह आपको पेट से सम्बंधित बहुत सारी बिमारियों से दूर रखता है।
  • सुप्त वज्रासन योग रक्त संचार में: यह आसन रक्त संचार को बेहतर बनाता है और इस तरह से आपको बहुत सारी परेशानियों से बचाता है।
  • सुप्त वज्रासन योग पीठ दर्द में: इसका नियमित अभ्यास से आप अपने पीठ की दर्द को कम कर सकते हैं।
  • सुप्त वज्रासन योग घुटने के लिए: यह आपके घुटने को मजबूत बनाता है।
  • सुप्त वज्रासन योग जांघों के लिए: यह आपके जांघों के मांसपेशियों के लिए बेहद मुफीद योगाभ्यास है।
  • सुप्त वज्रासन योग पेट की चर्बी के लिए: इस आसन का नियमित अभ्यास से आप पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं।
  • सुप्त वज्रासन योग रीढ़ की हड्डी के लिए: यह मेरुदंड को स्वस्थ करते हुए चुस्त दुरुस्त भी रखता है।
  • अस्थमा के लिए योग: इसके अभ्यास से आप अपने अस्थमा को बहुत हद तक कण्ट्रोल कर सकते हैं।
  • कमर पतला करने के लिए: इस आसन के अभ्यास से आप अपने कमर को पतला, खूबसूरत बना सकते हैं।
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नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन

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सुप्त का अर्थ होता है सोया हुआ अर्थात वज्रासन की स्थिति में सोया हुआ। इस आसन में पीठ के बल लेटना पड़ता है, इसिलिए इस आसन को सुप्त-वज्रासन कहते है, जबकि वज्रासन बैठकर किया जाता है

विधिः 

१.      वज्रासन में बैठकर हाथों को पाश्व भाग में रखकर उनकी सहायता से शरीर को पीछे झुकाते हुए भूमि पर सर को टिका दीजिये। घुटने मिले हुए हों तथा भूमि पर ठीके हुए हों। 
२.      धीरे-धीरे  कंधो,ग्रीवा एवं पीठ को भूमि पर टिकाने का प्रयत्न कीजिये।  हाथों को जंघाओं पर सीधा रखे। 
३.      आसन को छोड़ते समय कोहनियों एवं हाथों का सहारा लेते हुये वज्रासन में बैठ जाइए।  Read More : नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन about नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन

शशकासन योग के फायदे

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शशक का का अर्थ होता है खरगोश। इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की खरगोश जैसी आकृति बन जाती है इसीलिए इसे शशकासन कहते हैं। इस आसन को कई तरीके से किया जाता है यहां प्रस्तुत है सबसे सरल तरीका।

आसन विधि : सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को श्वास भरते हुए ऊपर उठा लें। कंधों को कानों से सटा हुआ महसूस करें। फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, श्वास बाहर निकालते हुए हथेलियां को भूमि पर टिका दें। फिर माथा भी भूमि पर टिका दें। कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर पुनः वज्रासन की‍ स्थिति में आ जाइए। Read More : शशकासन योग के फायदे about शशकासन योग के फायदे

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