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नासा पर्यटकों के लिए खोलेगा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन

नासा पर्यटकों के लिए खोलेगा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन

पर्यटक अगले साल से नासा के अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर जा सकेंगे. इसके लिए उन्हें एक रात के 35 हज़ार डॉलर चुकाने होंगे.

अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि वो स्पेस स्टेशन को पर्यटन और दूसरे व्यापारिक उपक्रमों के लिए खोल रही है.

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की उप निदेशक रॉबिन गैटेंस ने कहा कि हर साल कम अवधि के दो प्राइवेट अंतरिक्ष मिशन भेजे जाएंगे. इन मिशन का खर्च निजी कंपनियां उठाएंगी.

नासा ने बताया कि प्राइवेट अंतरिक्ष-यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन तक जाने के लिए तीस दिन तक का वक्त मिलेगा. वो अमरीका के स्पेसक्राफ्ट से यात्रा करेंगे. Read More : नासा पर्यटकों के लिए खोलेगा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन about नासा पर्यटकों के लिए खोलेगा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन

क्या शुक्र ग्रह में कभी इंसान रहते थे ? जानिए शुक्र ग्रह के इतिहास को

क्या शुक्र ग्रह में कभी इंसान रहते थे ? जानिए शुक्र ग्रह के इतिहास को

हेल्लो दोस्तों आज के इस विडियो में मैं आपको बताऊंगा हमारे पृथ्वी की जुड़वाँ ग्रह शुक्र (Venus) की कहानी शुक्र ग्रह हमारे सौरमंडल का सूरज से दूसरा प्लेनेट है और हमारे सौरमंडल का सबसे गरम प्लेनेट | शुक्र ग्रह आकर और घनत्व में हमारे पृथ्वी के लगभग बराबर है लेकिन यहाँ जिन्दा रहना नामुमकिन ये एक मात्र ऐसा प्लेनेट है जो उलटी दिशा में घूमता है परन्तु वैज्ञानिक ऐसा मानते है की आज से कुछ करोड़ साल पहले यह बिलकुल पृथ्वी की जुड़वाँ ही यहाँ भी पृथ्वी के सामान समुद्र हुआ करती थी लेकिन आज वो बदल चुकी है | आखिर किस घटना ने शुक्र को बेजान बना दिया आईये जानते है आज के इस विडियो में

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प्लूटो के साथ क्या हुआ क्या प्लूटो अब नही रहा ?

प्लूटो के साथ क्या हुआ क्या प्लूटो अब नही रहा ?

हेल्लो दोस्तों आज के इस विडियो में मैं आपको बताऊंगा प्लूटो के बारे में आज हम प्लूटो की कहानी को जानेंगे शुरुवात से आपमें से कई लोग मुझे comment में पूछते है की Pluto को क्यों उड़ाया गया था क्या प्लूटो अब नही रहा या फिर ये आज भी अस्तित्व में है तो प्लूटो की खोज साल 1930 में हुई थी और जिस समय इसकी खोज हुई थी तब इसे इसके वास्तविक आकार से कई गुना ज्यादा अनुमानित किया गया था लेकिन बाद में जब इसे करीब से observe किया गया था तब देखा गया की ये तो बोहोत ही छोटा है परन्तु इसे साल 2006 में प्लेनेट के category से हटा दिया गया और इसे Dwarf planet के रूप में reclassify किया गया परन्तु ये पहली प्लेनेट थी Read More : प्लूटो के साथ क्या हुआ क्या प्लूटो अब नही रहा ? about प्लूटो के साथ क्या हुआ क्या प्लूटो अब नही रहा ?

अरबों किलोमीटर का सफ़र संभव

अरबों किलोमीटर का सफ़र संभव

बहुत से लोग अंतरिक्ष में दूर तक की सैर का ख़्वाब देखते हैं. मगर अंतरिक्ष तो अनंत है. उसका कोई ओर-छोर नहीं. इंसान ने अब तक अरबों किलोमीटर के इसके विस्तार के एक हिस्से को ही जाना है. और मौजूदा अंतरिक्ष यान से आकाश के उस कोने तक पहुंचकर वापस धरती पर आना किसी एक इंसान की ज़िंदगी में मुमकिन नहीं.

तो आख़िर कौन सा ज़रिया हो सकता है जिससे अंतरिक्ष में अरबों किलोमीटर का सफ़र हम जल्द से जल्द तय कर सकें? फिर वहां से आकर बाक़ी लोगों को इस सफ़र की दास्तां सुना सकें. Read More : अरबों किलोमीटर का सफ़र संभव about अरबों किलोमीटर का सफ़र संभव

प्रकाश गति से तेज यान

प्रकाश गति से तेज यान

प्रकाशगति से तेज यात्रा मे सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वैज्ञानिक नियमो के अनुसार प्रकाश गति से या उससे तेज यात्रा संभव नही है। यह आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत का उल्लंघन है जिसके अनुसार प्रकाशगति किसी भी कण की अधिकतम सीमा है। कोई भी वस्तु जो अपना द्रव्यमान रखती है वह प्रकाशगति प्राप्त नही कर सकती है; उसे प्रकाशगति प्राप्त करने अनंत ऊर्जा चाहिये जोकि संभव नही है। Read More : प्रकाश गति से तेज यान about प्रकाश गति से तेज यान

क्या एलीयन पृथ्वी पर आते है?

क्या एलीयन पृथ्वी पर आते है?

क्या वे पृथ्वी पर फ़िल्मों मे दिखाये अनुसार आक्रमण कर सकते है?

UFO

शायद नही। तारों के मध्य दूरी अत्याधिक होती है। सूर्य के सबसे निकट का तारा प्राक्सीमा सेंटारी 4 प्रकाश वर्ष दूर है, उससे प्रकाश को भी हम तक पहुँचने मे 4 वर्ष लगते है। प्रकाश की गति अत्याधिक है, वह एक सेकंड मे लगभग तीन लाख किमी की यात्रा करता है। तुलना के लिये सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने केवल आठ मिनट लगते है। कई प्रकाश वर्ष की दूरी तय करने के लिये इतनी दूरी तक यात्रा करने मे वर्तमान के हमारे सबसे तेज राकेट को भी सैकड़ों वर्ष लगेंगे। Read More : क्या एलीयन पृथ्वी पर आते है? about क्या एलीयन पृथ्वी पर आते है?

मंगल ग्रह पर बहते पानी के सबूत: नासा

मंगल ग्रह

नासा का नया डाटा दर्शाता है कि मंगल ग्रह की सतह पर बहता हुआ पानी मौजूद है. तरल पानी की मौजूदगी बताती है कि मंगल ग्रह अभी भी भौगोलिक रूप से सक्रिय है. नई खोज से मंगल ग्रह पर जीवन के होने की संभावना भी बढ़ गई है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह पर देखी गई ग़हरी लकीरों को अब तरल पानी के सामयिक बहाव से जोड़कर देखा जा सकता है.

नासा के उपग्रहों से मिला डाटा दर्शाता है कि चोटियों पर दिखने वाले ये लक्षण नमक की मौजूदगी से जुड़े हैं. Read More : मंगल ग्रह पर बहते पानी के सबूत: नासा about मंगल ग्रह पर बहते पानी के सबूत: नासा

ओज़ोन परत का छेद 40 लाख वर्ग किलोमीटर हुआ छोटा हुआ

ओज़ोन परत का छेद 40 लाख वर्ग किलोमीटर हुआ छोटा हुआ

अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों के अनुसार, साल 2000 से अब तक ओज़ोन परत का छेद 40 लाख वर्ग किलोमीटर छोटा हुआ है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि साल 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत, अधिकतर देशों द्वारा क्लोरो फ्लोरो कार्बन (सीएफसी) गैसों पर प्रतिबंध लगाने के बाद ओज़ोन परत सेहतमंद हुई है।

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3 सूर्योदय, सूर्यास्त वाले बड़े ग्रहो की खोज

3 सूर्योदय, सूर्यास्त वाले बड़े ग्रहो की खोज

वाशिंगटन : वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से 340 प्रकाशवर्ष दूर और बृहस्पति ग्रह के द्रव्यमान से चार गुना वजनी एक नये ग्रह की खोज की है जो तीन तारों की परिक्रमा लगाता है और मौसमों के अनुरूप हर दिन तीन बार सूर्योदय और सूर्यास्त का दीदार करता है। Read More : 3 सूर्योदय, सूर्यास्त वाले बड़े ग्रहो की खोज about 3 सूर्योदय, सूर्यास्त वाले बड़े ग्रहो की खोज

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