रोबोट निष्क्रिय करता है बम को

रोबोट निष्क्रिय करता है बम को

अभी हाल ही में अमरीका के डलास में पुलिस ने एकदम नया तजुर्बा किया. शूटआउट में कई पुलिसवालों को मारने वाले शख़्स को, पुलिस ने एक रोबोट की मदद से किए विस्फोट से मार दिया.

डलास की पुलिस का कहना था कि उसे ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि हमलावर बहुत शातिर था. उसे पकड़ने या मारने के चक्कर में ही कई पुलिसवालों की जान चली गई थी.

तब पुलिस ने एक और जान गंवाने का जोखिम लेने की जगह, हमलावर को खत्म करने के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया.

इस घटना के बाद ख़तरनाक मिशन पर भेजे जाने वाले रोबोट पर पूरी दुनिया में चर्चा तेज़ हो गई.

ऐसे रोबोट को उन जगहों पर भेजा जा सकता है, जहां जाने से इंसान घबराते हैं. इन्हें बहुत ख़तरनाक मिशन पर भेजा जा सकता है. मंगल पर रोबोट भेजे गए हैं.

हालांकि वहां से रोबोट आंकड़े तो भेज सकते हैं मगर धरती पर वापस कभी नहीं आ सकते हैं. इसी तरह बम निष्क्रिय करने में भी बरसों से रोबोट का इस्तेमाल होता रहा है.

पिछले क़रीब चालीस सालों से ख़तरनाक मिशन पर रोबोट भेजे जाते रहे हैं.

हालांकि ख़तरनाक बमों को निष्क्रिय करने वाले रोबोट को बम निरोधक रोबोट कहना ग़लत है.

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के मुताबिक़, रोबोट वो मशीन है जो कई तरह के पेचीदा काम ख़ुद ब ख़ुद कर सकते हैं. बम निष्क्रिय करने वाली मशीनें, पेचीदा काम नहीं करतीं. वे ये काम ख़ुद भी नहीं करतीं. उन्हें इंसान नियंत्रित करते हैं और इंसानों के आदेश पर ही वो काम करती हैं. इन्हें धरती पर चलने वाला ड्रोन कहा जाए तो ज़्यादा बेहतर होगा.

बम को नाकाम करने वाले रोबोट को ब्रिटिश फौज में 'बॉम्ब डॉक्टर्स' कहा जाता है. वे बम के क़रीब जाकर उसकी पड़ताल करते हैं और उसे निष्क्रिय करते हैं. इससे इंसान, जोखिम उठाने से बच जाते हैं. जो भी ख़तरा या नुक़सान होना होता है वो मशीनों को होता है.

ये रोबोट सिर्फ़ बमों को नाकाम नहीं करते. दूसरे ऐसे विस्फोटकों को भी ये नाकाम करते हैं जिनमें धमाका होने का डर रहता है.

सबसे पहले 1972में ब्रिटिश फऱौज के एक लेफ्टिनेंट कर्नल को ये ख़याल आया था कि रिमोट से चलने वाली मशीन से विस्फोटकों को नाकाम किया जाए. उनका नाम था पीटर मिलर.

पीटर ने सलाह दी थी कि कार बम जैसी ख़तरनाक चीज़ों को बस्ती से दूर ले जाने के लिए किसी मशीन की मदद ली जाए. इससे इंसानों को जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा. हालांकि जो मशीन पीटर मिलर ने तैयार कि उसे चलाना आसान नहीं था. फिर उस मशीन को बेहतर बनाने की ज़िम्मेदारी, ब्रिटिश फौज की इंजीनियरिंग कमान को दी गई.

बाद में पीटर मिलर ने अपनी मशीन में वाटरजेट को भी जोड़ लिया. यानी ऐसा ज़रिए जिसमें पानी की तेज़ धार की मदद से कोई तार काटी जाती थी. इसकी मदद से बम की तार को काट कर उसे नाकाम किया जाता था.

आज की तारीख़ में बम निष्क्रिय करने वाले रोबोट की ज़िम्मेदारी होती है कि वो बम के वायरिंग सिस्टम को काट दे ताकि उसमें विस्फोट न हो सके.

रोबोट इसके लिए पानी की तेज़ धार का इस्तेमाल करते हैं. वैसे कुछ बमों में वायरिंग के अलावा भी दूसरे तरीक़े से विस्फोट का इंतज़ाम रहता है. इसीलिए बम निष्क्रिय करने के काम में रोबोट का इस्तेमाल करना ज़्यादा बेहतर तरीक़ा है. ताकि, अगर तार कटने से विस्फोट हो तो किसी इंसान की जान न जाए.

बम नाकाम करने वाले रोबोट को रिमोट की मदद से चलाया जाता है. इसे थोड़ी दूर पर बैठा कोई इंसान चलाता है. वो लोग रोबोट में लगे कैमरों की मदद से किसी संदिग्ध विस्फोटक को देख पाते हैं. फिर उसी हिसाब से रोबोट को आगे बढ़कर काम करने का कमांड देते हैं.

आम तौर पर रोबोट के सामने की तरफ़ एक कैमरा होता है. फिर उसके दोनों हाथों में कैमरे लगे होते हैं. जिससे संदिग्ध सामान की साफ़ तस्वीर, रोबोट चलाने वाले को दिखती रहे.

जब शुरू में रोबोट बम नाकाम करने में इस्तेमाल किए जाते थे, तो इन्हें रस्सी की मदद से चलाया जाता था. फिर तकनीक बेहतर हुई तो इस काम में तारों का इस्तेमाल होने लगा. लेकिन कई बार इन तारों के उलझने का डर होता था. फिर ऊबड़-खाबड़ जगहों पर रोबोट के अपनी ही तारों में उलझने की घटनाएं हुईं.

मगर आज ज़्यादातर बम निष्क्रिय करने वाले रोबोट, वायरलेस सिस्टम से लैस होते हैं. उन्हें वीडियो गेम खेलने में इस्तेमाल होने वाले हैंडल की मदद से चलाया जाता है. इससे उन्हें काफ़ी दूर से और आसानी से क़ाबू किया जा सकता है.

ब्रिटेन के एडिनबर्ग सेंटर ऑफ रोबोटिक्स के सेतु विजयकुमार कहते हैं कि आज ज़्यादातर रोबोट को हाथ से उछालकर विस्फोटकों की तरफ बढ़ाया जाता है. अगर उनसे कोई तार जुड़ा होगा तो उन्हें चलाना मुश्किल होगा. इसलिए वायरलेस रोबोट सिस्टम बनाए गए हैं. वो ड्रोन की तरह काम करते हैं और उन्हें रिमोट की मदद से नियंत्रित किया जाता है.

पहले के रोबोट टैंक जैसे चलते थे. जिनके पहियों के चारों तरफ़ ट्रैक से लगे होते थे. ताकि से ऊंचे-नीचे रास्तों से आराम से गुज़र सकें. आज की तारीख़ में चार से छह पहियों वाले रिमोट कंट्रोल्ड रोबोट आ गए हैं. इनमें से कई तो ऐसे हैं जो सीढ़ियां चढ़ सकते हैं.

इनकी बांहों में भी काफ़ी सुधार किया गया है. जिनसे कई सारी मशीनें जोड़ी जा सकती हैं. नई तकनीक से लैस ये बम निरोधक रोबोट, रास्ते की बाधाओं को पार करते हुए अपने मिशन को अंजाम देते हैं.

इन्हें इतना मज़बूत बनाया जाता है कि कई तरह के झटके झेल जाएं. इनकी राह में आने वाले रोड़े इनके मिशन में बाधा न डालें, इसलिए दिन-ब-दिन इन रोबोट की तकनीक को सुधारा जा रहा है.

बम निरोधक रोबोट कई तरह के होते हैं. कुछ इतने छोटे होते हैं कि उन्हें पीठ पर लादकर चलने वाले बैग में रखकर ले जाया जा सकता है. वहीं कुछ इतने बड़े होते हैं जैसे कि घास काटने वाली मशीन. कुछ बम निरोध रोबोट में एक्सरे मशीनें लगी होती हैं, तो कइयों में विस्फोटक की पहचान करने वाले डिटेक्टर लगे होते हैं.

तकनीक की तरक़्क़ी से आगे चलकर और भी उन्नत रोबोट बनाने की तैयारी चल रही है. इनमें से कई ऐसे होंगे जो दीवार फांदकर दूसरी तरफ़ जा सकेंगे. वहीं कुछ ऐसे होंगे जो अपने हाथों से कार की डिक्की खोलकर उसके अंदर झांक सकेंगे.

वैसे, अब विस्फोटक नाकाम करने के लिए एक नहीं, दो-तीन रोबोट इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया जा रहा है. एक रोबोट से विस्फोटक की पहचान होगी. वहीं दूसरे की मदद से उसे नाकाम किया जाएगा.

रोबोट के एक्सपर्ट सेतु विजय कुमार कहते हैं कि रोबोट के इस्तेमाल से कई ज़िंदगी बचाई जा सकी हैं. आगे चलकर और भी ख़तरनाक मिशन पर रोबोट को भेजा जाएगा. उन्हें रिमोट से चलाया जाएगा, ताकि चलाने वाला भी ख़तरे से दूर रहे. और अगर ख़तरा बड़ा है तो रोबोट को शहीद भी किया जा सकता है. इससे कम से कम इंसानों की जान तो बच जाएगी.

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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