योगासन करने की विधि

अगर सुबह सुबह योग किया जाए तो सारा दिन शरीर चुस्त दुरुस्त और स्फूर्ति से भरपूर रहता है। एक एक्टिवनेस और ऊर्जा बनी रहती है। सुबह सुबह हमारा मन शांत होता है और प्रदूषण स्तर कम होने के कारण वायु भी साफ होती है।

– योग करने के लिए हल्के और खुले कपड़े पहनें। खुले कपड़े पहनने से आप सभी योगासन आसानी से कर सकेंगे। योग करने से पहले गहने और घड़ी इत्यादि को उतारकर रख दें।

– नियमित रूप से योग करने की आदत बनाएं। इससे मानसिक विकास होगा और एकाग्रता शक्ति बढ़ेगी। आपका दिमाग एक्टिव रहेगा जिससे याद की हुई चीज़ें लम्बे समय तक याद रहेंगी। चीज़ें सोचने समझने में भी आसानी होगी। पॉजिटिव ऊर्जा का संचार होगा।

– योगाभ्यास शुरु करते समय सभी आसन एक दिन में करने की सोच न रखें। इससे आपको पहले दिन ज़्यादा थकान नहीं होगी और अगले दिन योग के लिए उत्साह बना रहेगा। योग करने का समय भी धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए।

– योग की शुरु आप समूह में करें ताकि नियमित योग करने की प्रेरणा बनी रहे। आप योग केंद्र में भी एडमिशन ले सकते हैं।

– योग का लाभ लेने के नियम के अनुसार नियमित योग करना पड़ेगा। अगर आप सोचते हैं कि 30 दिन में सारे आसन खत्म करके आपका काम बन जाएगा तो यह बिल्कुल गलत है।

2018 में करें योगासन, फिर आप रहे फिट और स्‍वस्‍थ

सुर्यनमस्‍कार करे कुछ इस प्रकार 

योगासनो में सबसे असरकारी और लाभदायक सूर्यनमस्कार है। इसमें सभी आसनों का सार छिपा है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास 12 स्थितियों में होता है। इसके आसनों को बहुत ही आसानी से किया जा सकता है। सूर्य मुद्रा हमारे शरीर के अग्नि तत्वों को संचालित करती है। सूर्य की उंगली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य नमस्कार करने से आंखो की रोशनी बढती है, खून का प्रवाह तेज होता है, ब्लड प्रेशर में आरामदायक होता है, वजन कम होता है। सूर्य नमस्कार करने से कई रोगों से छुटकारा मिलता है। इसे करने से आने वाले साल में हर दिन स्‍वस्‍थ जीवन जी सकेंगे।

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योगासनों का सबसे बड़ा गुण

योगासनों का सबसे बड़ा गुण

 यह हैं कि वे सहज साध्य और सर्वसुलभ हैं। योगासन ऐसी व्यायाम पद्धति है जिसमें न तो कुछ विशेष व्यय होता है और न इतनी साधन-सामग्री की आवश्यकता होती है। योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं। आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोड़ने और ऐंठने वाली क्रियायें करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियायें भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापिस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्त्व है। Read More : योगासनों का सबसे बड़ा गुण about योगासनों का सबसे बड़ा गुण

सेहत और योग

सेहत और योग

योग शरीर को सेहतमंद बनाए रखता है और कई प्रकार की शरीरिक और मानसिक परेशानियों को दूर करता है. योग श्वसन क्रियाओं को सुचारू बनाता है. योग के दौरान गहरी सांस लेने से शरीर तनाव मुक्त होता है. योग से रक्त संचार भी सुचारू होता है और शरीर से हानिकारक टाँक्सिन निकल आते हैं. यह थकान, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है एवं ब्लड प्रेसर को सामान्य बनाए रखने में भी सहायक होता है.

 

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योगा करें और पायें निरोग आंखें

योगा करें और पायें

आखों के योग अपनाकर आजीवन अपनी दृष्टि को मजबूत बना सकते हैं। निश्चित अंतराल के बाद आखों की रोशनी अपने-आप कम हो जाती है। आखों के आसपास की मांसपेशियां अपने लचीलेपन को समाप्त कर देती हैं और कठोर हो जाती हैं। लेकिन अगर आखों के आस-पास की मासपेशिया मजबूत हों तो आखों की रोशनी बढ़ती है। आखों और दिमाग के बीच एक गहरा संबंध होता है। दिमाग की 40 प्रतिशत क्षमता आखों की रोशनी पर निर्भर होती है। जब हम अपनी आखों को बंद करते हैं तो दिमाग को अपने-आप आराम मिलता है। दुनिया की कुल आबादी की 35 प्रतिशत जनसंख्या निकट दृष्टि दोष और दूरदृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) से ग्रस्त है जिसकी वजह से लोग मोटे-मोटे चश्मों का प्र Read More : योगा करें और पायें निरोग आंखें about योगा करें और पायें निरोग आंखें

घुटनों के लिए जानू नमन आसन

घुटनों के लिए

ढलती उम्र में व्यक्ति को जोड़ों से संबंधित रोग होने लगते हैं। अंग-अंग दुखता है। ज्यादा दूर चला नहीं जाता या बहुत ऊपर चढ़ा नहीं। व्यक्ति तभी तक जवान रहता है, जब तक उसके सभी अंग और जोड़ तनावरहित रहते हैं। जो लोग जानू नमन आसन करते रहते हैं उनको यह समस्या कभी नहीं सताती।

जानू घुटने को कहते हैं। क्रम से घुटनों को मोड़ने और सीधा करने को जानू नमन कहते हैं। जानू नमन आसन में अंग संचालन (सूक्ष्म व्यायाम) के अंतर्गत आता है। Read More : घुटनों के लिए जानू नमन आसन about घुटनों के लिए जानू नमन आसन

व्यस्त लोगों के लिये ध्यान: श्वास को विश्रांत करें

श्वास को विश्रांत

जब भी आपको समय मिले, कुछ मिनटों के लिये अपनी श्वास-प्रक्रिया को शिथिल कर दें, और कुछ नहीं―पूरे शरीर को शिथिल करने की कोई आवश्यकता नहीं। रेलगाड़ी में बैठे हों या हवाई जहाज में, या फिर कार में, किसी को पता नहीं लगेगा की आप कुछ कर रहे हैं। बस अपनी श्वास-प्रक्रिया को शिथिल कर लें। जब यह सहज हो जाये तो इसे होने दें। तब आंखें बंद कर लें और इसे देखें- श्वास भीतर जा रही है, बाहर जा रही है, भीतर जा रही है...

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पेट के रोग में राम-बाण है अग्निसार क्रिया

अग्निसार क्रिया

हमारे शरीर को 13 प्रकार की अग्नियां चलाती हैं, जिनमें खाना पचाने में उपयोगी सात धातुओं की अग्नि, पांच भूतों की अग्नि व एक भूख लगाने वाली जठराग्नि होती है। अतः जो इन 13 प्रकार की अग्नियों को बल दे, उसे अग्निसार कहते हैं। यह क्रिया पेट के रोगों से जीवन भर बचाव के लिए बड़ी महत्वपूर्ण है। यह भी षट्कर्म का एक अभ्यास है। Read More : पेट के रोग में राम-बाण है अग्निसार क्रिया about पेट के रोग में राम-बाण है अग्निसार क्रिया

प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा

अपानवायु मुद्रा

मुद्राओं का जीवन में बहुत महत्व है। मुद्रा दो तरह की होती है पहली जिसे आसन के रूप में किया जाता है और दूसरी हस्त मुद्राएँ होती है। मुद्राओं से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ प्रस्तुत है प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा की विधि और लाभ।

प्राण मुद्रा : छोटी अँगुली (चींटी या कनिष्ठा) और अनामिका (सूर्य अँगुली) दोनों को अँगूठे से स्पर्श करो। इस स्थिति में बाकी छूट गई अँगुलियों को सीधा रखने से अंग्रेजी का 'वी' बनता है। Read More : प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा about प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा

अगर एनर्जी पानी है, तो कीजिए ये योग मुद्राएं

कीजिए ये योग मुद्राएं

योगा आपके शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम करता है। ये एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और शरीर और आत्मा का मिलन होता है। योगा से तनाव तो कम होता ही है, साथ ही ये वजन कम करने से लेकर कई अन्य बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होता है।
बालासन
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खांसी और जुकाम बस दस मिनट..........गायब

खांसी और जुकाम

मौसम के परिवर्तन के कारण संक्रमण से कई बार वाइरल इंफेक्शन के कारण हमारे गले व फेफड़ों में जमने वाली एक श्लेष्मा होती है जो खांसी या खांसने के साथ बाहर आता है। यह फायदेमंद और नुकसानदायक दोनों है। इसे ही कफ कहा जाता है। अगर आप भी खांसी या जुकाम से परेशान है तो बिना दवाई लिए भी रोज सिर्फ दस मिनट इस मुद्रा के अभ्यास से कफ छुटकारा पा सकते हैं।

मुद्रा- बाएं हाथ का अंगूठा सीधा खडा कर दाहिने हाथ से बाएं हाथ कि अंगुलियों में परस्पर फँसाते हुए दोनों पंजों को ऐसे जोडें कि दाहिना अंगूठा बाएं अंगूठे को बहार से कवर कर ले,इस प्रकार जो मुद्रा बनेगी उसे अंगुष्ठ मुद्रा कहेंगे। Read More : खांसी और जुकाम बस दस मिनट..........गायब about खांसी और जुकाम बस दस मिनट..........गायब

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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