राग परिचय
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी
Submitted by Anand on 1 July 2021 - 3:03amमध्यमग्राम-तान-बोधिनी
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षड्जहीन तानें |
ऋषभहीन तानें |
गान्धारहीन तानें |
ऋषभधैवत- हीन तानें |
निषादगान्धार- हीन तानें |
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सावित्री |
अग्निचित् |
सर्वस्वदक्षिण |
त्रैलोक्यमोहन |
भैरव |
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अर्द्धसावित्री |
द्वादशाह |
दीक्षा |
वीर |
कामद |
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि
Submitted by Anand on 20 June 2021 - 11:53amसा और प को अचल स्वर माना जाता है। जबकि अन्य स्वरों के और भी रूप हो सकते हैं। जैसे 'रे' को 'कोमल रे' के रूप में गाया जा सकता है जो कि शुद्ध रे से अलग है। इसी तरह 'ग', 'ध' और 'नि' के भी कोमल रूप होते हैं। इसी तरह 'शुद्ध म' को 'तीव्र म' के रूप में अलग तरीके से गाया जाता है।
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सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है
Submitted by Anand on 27 March 2021 - 3:14pmसंगीत में वह शब्द जिसका कोई निश्चित रूप हो और जिसकी कोमलता या तीव्रता अथवा उतार-चढ़ाव आदि का, सुनते ही, सहज में अनुमान हो सके, स्वर कहलाता है। भारतीय संगीत में सात स्वर (notes of the scale) हैं, जिनके नाम हैं - षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत व निषाद।
यों तो स्वरों की कोई संख्या बतलाई ही नहीं जा सकती, परंतु फिर भी सुविधा के लिये सभी देशों और सभी कालों में सात स्वर नियत किए गए हैं। भारत में इन सातों स्वरों के नाम क्रम से षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद रखे गए हैं जिनके संक्षिप्त रूप सा, रे ग, म, प, ध और नि हैं। Read More : सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है about सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज।
Submitted by Anand on 18 March 2021 - 7:20am्रिम नाद उत्पन्न करता है। संगीत दामोदर में नाद तीन प्रकार का माना गया है—प्राणिभव, अप्राणिभव और उभयसंभव। जो सुख आदि अंगों से उत्पन्न किया जाता है वह प्राणिभव, जो वीणा आदि से निकलता है वह अप्राणिभव और जो बाँसुरी से निकाला जाता है वह उभय- संभव है। नाद के बिना गीत, स्वर, राग आदि कुछ भी संभव नहीं। ज्ञान भी उसके बिना नहीं हो सकता। अतः नाद परज्योति वा ब्रह्मरुप है और सारा जगत् नादात्मक है। इस दृष्टि से नाद दो प्रकार का है— आहत और अनाहत। अनाहत नाद को केवल योगी ही सुन सकते हैं। इठयोग दीपिका में लिखा है कि जिनको तत्वबोध न हो सके वे नादोपासना करें। अँतस्थ नाद सुनने के लिये चाहिए कि एकाग्रचित होकर शां Read More : नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। about नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज।
राग भूपाली
Submitted by Anand on 15 February 2021 - 3:45amराग भूपाली
राग परिचय--
: यह राग भूप के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। इसका विस्तार तथा चलन अधिकतर मध्य सप्तक के पूर्वांग व मन्द्र सप्तक में किया जाता है। यह चंद्र प्रकाश के समान शांत स्निग्ध वातावरण पैदा करने वाला मधुर राग है। जिसका प्रभाव वातावरण में बहुत ही जल्दी घुल जाता है। रात्रि के रागों में राग भूपाली सौम्य है। शांत रस प्रधान होने के कारण इसके गायन से वातावरण गंभीर व उदात्त बन जाता है। राग भूपाली कल्याण थाट का राग है। Read More : राग भूपाली about राग भूपाली
षड्जग्राम-तान बोधिनी
Submitted by Anand on 23 November 2020 - 4:10pmषड्जग्राम-तान बोधिनी
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षड्जहीन तानें |
ऋषभहीन तानें |
पंचमहीन तानें |
निषादहीन तानें |
षड्जपंचम- हीन तानें |
निषादगांधार- हीन तानें |
पंचमऋषभ- हीन तानें |
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अग्निष्टोम |
स्विष्टकृत् |
अश्वक्रान्त |
चातुर्मास्य |
इडा |
ज्योतिष्टोम |
सौभाग्यकृत् |
राग मुलतानी
Submitted by Anand on 27 November 2019 - 9:23amराग मुलतानी
थाठ: तोड़ी वादी: प संवादी: सा जाति: औडव-संपूर्ण आरोह में रे और ध वर्जित स्वर हैं गायन समय: दिन का चौथा प्रहर स्वर:- कोमल रे, कोमल ग, तीव्र म का प्रयोग, बाकी सब स्वर शुद्ध
नीचे आप जहाँ भी ~ चिन्ह देखें, ये मीड़ दर्शाने के लिये है।
और () खटका दिखाने के लिये। अर्थात अगर (सा) दिखाया गया है तो इसे 'रे सा ऩि सा' गाया जायेगा।
राग परिचय:
आरोह: ऩि सा म॑~ग॒ म॑~प, नि सां।
अवरोह: सां नि ध॒ प, म॑ ग॒ म॑ ग॒, रे॒ सा।
पकड़: ऩि सा म॑~ग॒ ऽ म॑ प, म॑ ग॒ म॑ ऽ ग॒ रे॒ सा। Read More : राग मुलतानी about राग मुलतानी
क्या हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में भगवान शंकर को समर्पित भी है कोई राग?
Submitted by Anand on 27 November 2019 - 9:21amसाल 1978 की बात है. मशहूर अभिनेता देव आनंद एक फिल्म बना रहे थे- देस परदेस. इस फिल्म के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर भी वही थे. इस फिल्म को सिनेमा फैंस कई वजहों से याद करते हैं. एक तो बतौर अभिनेत्री टीना मुनीम की ये पहली फिल्म थी. दूसरे इस फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट में अजीत, प्राण, अमजद खान, श्रीराम लागू, टॉम ऑल्टर, बिंदू, प्रेम चोपड़ा, एके हंगल, सुजीत कुमार, महमूद और पेंटल जैसे उस दौर के जाने-माने चेहरे शामिल थे. इसके अलावा इस फिल्म के लिए देव आनंद ने बतौर संगीतकार राजेश रोशन को चुना था. Read More : क्या हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में भगवान शंकर को समर्पित भी है कोई राग? about क्या हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में भगवान शंकर को समर्पित भी है कोई राग?
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-
Submitted by Anand on 27 November 2019 - 8:47amराग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-
थाट-कल्याण
गायन समय-रात्रि का द्वितीय प्रहर
जाति-ओडव-सम्पूर्ण (आरोह मे रे,ध स्वर वर्जित हैं)
विद्वानों को इस राग के वादी तथा संवादी स्वरों मे मतभेद है-
कुछ विद्वान मारू बिहाग मे वादी स्वर-गंधार व संवादी निषाद को मानते है इसके विपरीत अन्य संगीतज्ञ इसमे वादी स्वर पंचम व संवादी स्वर षडज को उचित ठहराते हैं ।
प्रस्तुत राग मे दोनो प्रकार के मध्यम स्वरों ( शुद्ध म व तीव्र म ) का प्रयोग होता है । शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयुक्त होते हैं । Read More : राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- about राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-
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