​LED की लीड

​ LED की लीड

एक साधारण-सी जरूरत के मिशन बन जाने की कहानी है LED रेवलूशन। उजाला यानी उन्नत ज्योति बाय अफर्डेबल फॉर ऑल योजना वाकई लोगों के घरों में उजाला भर रही है। इसके तहत देश में 77 करोड़ एलईडी बल्ब लगाने की योजना है और अब तक करीब 26 करोड़ से ज्यादा बल्ब लगाए भी जा चुके हैं। इस मिशन ने बिजली और पैसों की बचत के साथ-साथ प्रदूषण भी कम किया है। देश में हो रहे LED रेवलूशन का जायजा ले रहे हैं लोकेश के. भारती

जब उजाला योजना पर काम शुरू हुआ था तो इससे जुड़े लोग सफलता को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं थे। एलईडी रेवलूशन की राह इतनी आसान भी नहीं थी क्योंकि इस योजना की जब शुरुआत हुई थी तो एलईडी बल्ब की कीमत सामान्य बल्ब से 30-35 गुना ज्यादा थी। करीब 3 साल पहले जब कोई एक एलईडी बल्ब खरीदना चाहता था तो उसे 300 रुपये से भी ज्यादा खर्च करने पड़ते थे, जबकि सामान्य बल्ब की कीमत बमुश्किल 10 से 12 रुपये थी। ज्यादा दाम इसकी कामयाबी में बड़ी रुकावट थी। इसकी वजह थी कि उस वक्त एलईडी बल्बों का उत्पादन लाखों के बजाय हजारों में होता था। इससे लागत ज्यादा आती थी। इस समस्या से निबटने का इकलौता तरीका था ज्यादा से ज्यादा एलईडी बल्ब का प्रॉडक्शन ताकि इनकी कीमत कम हो सके। ऐसे में ऊर्जा मंत्रालय के तहत एनटीपीसी, पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन जैसे पीएसयूज़ ने मिलकर EESL का गठन किया ताकि एलईडी रेवलूशन को अंजाम तक पहुंचाया जा सके।

योजना की सफलता ऐसी कि दूर देश के लोग भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। टैक्सस में रहनेवालीं 13 साल की मीरा वशिष्ठ को जब उजाला योजना के बारे में पता चला तो उन्होंने दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के घरों में एलईडी बल्ब लगवाने के लिए पैसे जुटाना शुरू कर दिया। पैरंट्स की मदद से करीब एक साल में मीरा ने करीब 1 लाख 40 हजार रुपये जुटा लिए। इस रकम से एलईडी बल्ब खरीदकर झुग्गियों में बांटे गए। ऐसी शानदार कोशिशें मिशन में अहम पड़ाव साबित हुईं।

कीमतें हुईं कम, तो बढ़ी दिलचस्पी
 

 

 

एलईडी की कीमतें जब बाजार में कम होने लगीं तो धीरे-धीरे लोगों ने इसमें दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया। लोग एक-दूसरे को एलईडी बल्ब के फायदे बताने लगे। सारी कोशिशों के बाद इसकी कीमतें करीब 88 फीसदी तक कम हो गईं। इसके बाद घरों के इतर स्ट्रीट लाइट और दूसरी जगहों पर भी बड़ी संख्या में एलईडी बल्ब लगने लगे। असम के बिलसाईपाड़ा की एसडीएम डॉ. एम. एस. लक्ष्मीप्रिया ने उजाला योजना के तहत 50,000 एलईडी बल्ब खरीदे और सरकारी स्कूल के बच्चों के बीच बंटवा दिए। दिल्ली-चंडीगढ़ हाइवे पर काफी ढाबे हैं, वहां की सजावट में बल्बों का यूज होता था और काफी बिजली खर्च होती थी। इनमें से करीब 30 ढाबों में एलईडी लाइटिंग शुरू करने में ईईएसएल ने मदद की। इसका सीधा फायदा इन ढाबा मालिकों को हुआ। जेनरेटर का इस्तेमाल कम हो गया और ओवरलोडिंग की समस्या से भी छुटकारा मिल गया। जब ये बातें दूसरे ढाबे वालों को पता चलीं तो उन्होंने भी अपने यहां एलईडी बल्ब लगवाए। इससे जहां बिजली का बिल कम हुआ, वहीं काफी बिजली भी बची, जो दूसरे अंधेरे घरों के काम आई। इस मिशन को कामयाब बनाने में पूर्व ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने काफी मेहनत की थी। राजनीतिक विश्लेषक इस बात की तस्दीक करते हैं कि ऊर्जा मंत्री को रेलवे मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने में इस मिशन की कामयाबी ने अहम भूमिका निभाई।

दरअसल, पहली बार एलईडी रेवलूशन के लिए जो सूत्र तैयार किया गया, उसका पहला प्रयोग पुदुचेरी में किया गया। 2014 में सिर्फ 6 महीने के अंदर 7 वाट के 60 लाख एलईडी बल्ब बेचे गए। उसी साल के आखिर में आंध्र प्रदेश से 60 लाख बल्ब की मांग आ गई। इतनी ज्यादा मांग का नतीजा यह रहा कि 2014 खत्म होते होते एक एलईडी बल्ब की कीमत 310 रुपये से घटकर 149 रुपये हो गई। हालांकि खुशी के बड़े लम्हे आने अभी बाकी थे। 2015 के शुरुआती महीनों में ही दिल्ली से 1.60 करोड़ एलईडी बल्बों की डिमांड आई और कीमत घटकर 82 रुपये पर पहुंच गई। जल्द ही 5 करोड़ नए बल्ब के ऑर्डर और पहुंची तो बल्ब की कीमत 70 रुपये पर आ गई।

सफलता बड़ी है!
जब किसी देश में पावर की डिमांड में 3.6 फीसदी की गिरावट आए तो इसे बहुत नहीं कहा जाएगा, लेकिन भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए यह बड़ी बात है, जहां पावर कट बेहद आम है। एलईडी बल्ब के इस्तेमाल ने ही यह करिश्मा किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार महज 32 महीनों के अंदर 25.79 करोड़ से ज्यादा सामान्य बल्बों को एलईडी बल्बों से बदला जा चुका है। यह संख्या हर दिन बढ़ रही है। सरकार का मकसद 77 करोड़ एलईडी बल्ब लगाने का है। इसके अलावा लाखों एलईडी ट्यूब लाइट्स और पंखे भी लगाए गए हैं।

ईईएसएल के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरव कुमार कहते हैं, 'चुनौती एलईडी बल्ब बेचने की नहीं थी, बल्कि राज्य सरकारों और लोगों को विश्वास दिलाने की थी कि यह उनके लिए फायदे का सौदा है। दरअसल, जब एलईडी को मार्केट में उतारा गया था तो लोग कीमत सुनकर ही मन बदल लेते थे और इसकी खासियतों के बारे में जानना भी नहीं चाहते थे। इसी तरह तमाम राज्य सरकार को यह यकीन दिलाना कि अगर वे एलईडी रेवलूशन को प्रमोट करेंगे तो पैसा बचाने के साथ ही पावर डिमांड और पलूशन में भी कमी आएगी, भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं था।'

यह आर्थिक फायदे की ही बात है कि ब्रिटेन और मलयेशिया जैसे देश भी उजाला मिशन में खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 

इन्वाइरनमेंट और जेब को फायदा
पहले 100 वॉट का एक बल्ब 10 घंटे तक इस्तेमाल करने पर एक यूनिट बिजली की खपत करता था। अब 9 वॉट का एक एलईडी बल्ब 111 घंटे तक इस्तेमाल करने पर एक यूनिट बिजली की खपत करता है। इससे साफ है कि यह कितनी बिजली बचाता है। यह इन्वाइरनमेंट के लिए भी बहुत फायदेमंद है। एलईडी रेवलूशन के बाद 2,71,36,152 टन प्रतिवर्ष कार्बन-डाई-ऑक्साइड गैस के उत्सर्जन में कमी आई है और यह लगातार जारी है। मर्करी न होने से ये पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
एलईडी के यूज से जहां आम लोगों के बिजली बिल में कमी आई है, वहीं सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी कुछ कम हुआ है। बिजली की खपत कम होने से अब ज्यादा घरों के रोशन होने का रास्ता भी साफ हो गया है। मिशन उजाला की सफलता का यह भी एक बड़ा कारण है।

सबको फायदे का मौका
देश का कोई भी नागरिक जिसने बिजली का कनेक्शन लिया हुआ है, उजाला योजना के तहत सस्ते एलईडी खरीद का फायदा उठा सकता है। यही नहीं, वे ईएमआई पर भी बल्ब खरीद सकते हैं। जाहिर है, लोअर इनकम ग्रूप भी इस वजह से इसका फायदा उठा पाया है। इसके लिए बिजली का बिल और सरकारी पहचान-पत्र देना होगा और अगर एक बार पेमेंट करके खरीदना चाहते हैं तो सरकारी पहचान-पत्र ही काफी है। ज्यादातर शहरों में इसके वितरण केंद्र हैं। यह रिटेल स्टोर पर नहीं मिलता। वितरण केंद्रों की पूरी जानकारी ujala.gov.in पर उपलब्ध है। खास बात यह है कि अगर एलईडी बल्ब खराब हो गया हो, लेकिन वह टूटा न हो तो तीन साल के अंदर ईईएसएल इसे मुफ्त में बदल देती है।

शिकायतें भी हैं
मार्केट में ऐसे एलईडी बल्ब भी उपलब्ध हैं, जो इससे भी कम दाम पर मिल जाएंगे। हालांकि ये जल्दी फ्यूज भी हो जाते हैं। बाजार के सूत्र कहते हैं कि ये ज्यादातर चाइनीज़ हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि लोग उन सेंटरों से ही LED की खरीदारी करें, जो रजिस्टर्ड हैं। कुछ शिकायतें LED बल्ब के फ्यूज होने पर बदलने में देरी होने को लेकर भी रही हैं। हालांकि सौरव कुमार इससे इनकार करते हैं। वह कहते हैं कि हमारे हेल्पलाइन नंबर हमेशा चालू करते हैं। अगर किसी को कोई समस्या है तो हेल्पलाइन नंबर, ईमेल या वेबसाइट पर जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है। उस पर तुरंत सुनवाई होगी।

सामान्य बल्ब, CFL और LED बल्ब
- सामान्य बल्ब की पीली रोशनी से निजात दिलाने के लिए सबसे पहले CFL बल्ब लाया गया। लोगों ने इसे खूब सराहा, लेकिन जल्द ही इसकी चमक LED बल्ब ने कम कर दी।
- एक सामान्य बल्ब तब रोशनी पैदा करता है, जब फिलामेंट गर्म करता है यानी यह बल्ब 90 फीसदी बिजली का इस्तेमाल फिलामेंट गर्म करने के लिए ही करता है।
-CFL बल्ब तब रोशनी उत्पन्न करता है, जब बिजली ट्यूब से भरी गैसों के बीच से पारित होती हैं। इसमें सामान्य बल्ब से कम लेकिन LED के मुकाबले ज्यादा बिजली खपत होती है। 
-CFL बल्ब का ऊपरी भाग यानी रोशनी करने वाला हिस्सा शीशे का बना हुआ होता है। ऐसे में इसके टूटने का खतरा हमेशा बना रहता है। 
-CFL बल्ब की गारंटी 6 महीने से 1 साल की होती है।
-LED बल्ब हल्के होते हैं और इनकी गारंटी 2 से 3 साल की होती है।
-LED के बाहर सिर्फ एक गोल और मजबूत प्लास्टिक ही निकला रहता है जोकि कभी फूटता नहीं। अगर फूट भी जाए तो भी अपना काम बखूबी करता है।
-15 वाट वाले CFL बल्ब की जगह पर 9 वाट का ही LED बल्ब इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ती है, यानी बिजली बिल में बल्ब से होने वाले खर्च में से 35% से भी ज्यादा की बचत होगी।

LED बल्ब की कीमत
उजाला के तहत मिलने वाली चीजों की कीमत है:
LED बल्ब: 70 रुपये
LED ट्यूबलाइट: 220 रुपये
LED पंखा: 1200 रुपये

अब तक लगाए गए हैं
25,79,68,000 बल्ब
31,60,725 ट्यूबलाइट
11,85,467 पंखे
3,000,000 स्ट्रीट लाइट 

LED बल्ब लगाने से
33,501 मिलियन किलोवाट बिजली की बचत हर साल
13,401 करोड़ रुपये की बचत सरकार को हर साल
6,707 मेगावाट बिजली की मांग हुई कम

ईईएसएल की भूमिका
पेट्रोल पंप और गैस स्टेशनों पर भी उपलब्ध
EESL ने पावर मिनिस्ट्री के साथ मिलकर पेट्रोलियम और नेचरल गैस मंत्रालय के साथ एमओयू भी साइन किया है जिसके तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल) अब उजाला कार्यक्रम को बढ़ावाा देंगी। इसके तहत अब LED बल्ब, ट्यूब और बिजली बचाने वाले पंखे आदि के रिटेल आउटलेट पेट्रोल पंपों और नेचरल गैस स्टेशनों पर भी मिला करेंगे। इसे फेज के अनुसार लागू किया जाएगा। पहले फेज में यूपी और महाराष्ट्र को शामिल किया गया है।
कहां करें शिकायत
टि्वटर: @EESL_India पर ट्वीट कर सकते हैं।
ईमेल: [email protected] पर शिकायत भेज सकते हैं।
वेबसाइट: ujala.gov.in साइट पर ऊपर दाईं तरफ शिकायत दर्ज कराने के लिए रेजॉल्यूशन टैब दिया गया है।
हेल्पलाइन नंबर: 1800-180-3580

 

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