Anand's blog

इंसान का दिमाग कभी भी, कुछ भी सोच सकता है, साबित करते हैं ये 28 OMG फैक्ट्स

मैं ऐसा क्यों हूं, मैं ऐसा क्यों हूं?

खुद को लेकर हम जितनी भी बातें सोचते हैं, उनमें से एक ये बात भी है कि हम ऐसे क्यों हैं? क्यों हम कुछ चीज़ों को लेकर ख़ास तरह से व्यवहार करते हैं. या क्यों हम हंसने के वक़्त रोते और रोने वाली बात पर हंसने लगते हैं.

जहां भक्ति है तब प्रयागराजी और जब शक्ति की बात हो तब इलाहाबादी

भगवान बुद्ध के विचार

भगवान बुद्ध

चार श्रेष्ठ सत्य -
१. दुनिया में दुःख है।
२. दुखों का कोई-न-कोई कारण है। 
३. दुखों का निवारण संभव है।
४. दुःख निवारण के लिए मार्ग है ।

- दुखों का मूल कारण अज्ञानता है। 
  अज्ञानता के कारण ही इंसान मोह-माया और तृष्णा में फंसा रहता है।
- अज्ञानता से छुटकारा पाने के लिए अष्टांग मार्ग का पालन  आवश्यक है जो कि इस प्रकार है-
१. सही समझ, 
२. सही विचार, 
३. सही वाणी, 
४. सही कार्य, 
५. सही आजीविका, 
६. सही प्रयास, 
७. सही सजगता और 
८. सही एकाग्रता

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फर्जी मैसेज रोकने में विफल हो रहा व्हाट्सएप, जा रही है लोगों की जान

फर्जी मैसेज

सोशल मीडिया के इस दौर में स्मार्टफोन लोगों को बेवकूफ बना रहा है। तेजी से फैलती झूठी खबरें न सिर्फ लोगों को गुमराह कर रही हैं, बल्कि लोगों की जान भी ले रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में सांप्रदायिक हिंसा के 822 मामले सामने आए थे।

पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश के दो निर्दोष लोगों को भीड़ ने पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में एक व्हाट्सऐप वीडियो सर्कुलेट हुआ था, जिसमें लोगों से कहा गया था कि दो लोग किसी आदमी के शरीर से अंग निकालने के लिए उसकी हत्या करने जा रहे हैं। Read More : फर्जी मैसेज रोकने में विफल हो रहा व्हाट्सएप, जा रही है लोगों की जान about फर्जी मैसेज रोकने में विफल हो रहा व्हाट्सएप, जा रही है लोगों की जान

रजनीशपुरम के बर्बाद होने के पीछे शीला का काला सच

रजनीशपुरम के बर्बाद होने के पीछे  शीला का काला सच

मां आनंद शीला 1981 से 1985 तक ओशो रजनीश की सचिव थी। इन चार साल में उसने ओशो को कई बार मारने का प्रयास किया। यही नहीं, ओशो तक पहुंच बनाने और कम्यून की सर्वेसर्वा बनने के लिए उसने ओशो संन्यासियों को धीमा जहर देकर मारने का भी प्रयास किया।

सत्ता और ध्यान मिलने की अपने लालच को छोड़कर शीला का एक अन्य प्रयोजन भी था ओशो रजनीश का खात्मा करने के लिए सरकार की मदद करना। लेकिन रजनीश के खात्मे तक भी शीला के कम्यून की सर्वेसर्वा बने रहने की योजना सफल नहीं हो पाई। Read More : रजनीशपुरम के बर्बाद होने के पीछे शीला का काला सच about रजनीशपुरम के बर्बाद होने के पीछे शीला का काला सच

बिजनेस शुरू करने से पहले जानें कानून का फंडा

बिजनेस शुरू करने से पहले जानें कानून का फंडा

स्टार्टअप शुरू करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उससे जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने की है। रजिस्ट्रेशन की रस्सी जकड़ने लगती है तो परमिशन का पंगा निपटाने में पसीने छूट जाते हैं। एक्सपर्ट्स की मदद से अमित मिश्रा बता रहे हैं कैसे निपटें स्टार्टअप के आड़े आने वाली लीगल अड़चनों से: बूझें स्टार्टअप की लीगल पहेली अक्सर देखने में आता है जब कोई स्टार्टअप बड़ा होने लगता है तो रजिस्ट्रेशन और परमिशन के भंवर में फंस कर रह जाता है। इससे बचने का सही तरीका यह है कि शुरुआत से ही कुछ वक्त और पैसा अपनी कंपनी के हिसाब से इनवेस्ट करें। स्टार्टअप की शुरुआत में दो तरह की कानूनी अड़चनें आती हैं: - रजिस्ट्रेशन: यह मुख् Read More : बिजनेस शुरू करने से पहले जानें कानून का फंडा about बिजनेस शुरू करने से पहले जानें कानून का फंडा

घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

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घुमक्कड़ के स्वावलंबी होने के लिए उपसुक्त कुछ बातों को हम बतला चुके हैं। क्षौरकर्म, फोटोग्राफी या शारीरिक श्रम बहुत उपयोगी काम हैं, इसमें शक नहीं; लेकिन वह घुमक्कड़ की केवल शरीर-यात्रा में ही सहायक हो सकते हैं। उनके द्वारा वह ऊँचे तल पर नहीं उठ सकता, अथवा समाज के हर वर्ग के साथ समानता के साथ घुल-मिल नहीं सकता। सभी वर्ग के लोगों में घुल-मिल जाने तथा अपने कृतित्व को दिखाने का अवसर घुमक्कड़ को मिल सकता है, यदि उसने ललित कलाओं का अनुशीलन किया है। हाँ, यह अवश्य है कि ललित-कलाएँ केवल परिश्रम के बल पर नहीं सीखी जा सकतीं। उनके लिए स्वामाविक रुचि का होना भी आवश्‍यक है। ललित-कलाओं में नृत्य, वाद्य और Read More : घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन) about घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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