ब्रह्मचर्य....स्वस्थ वैवाहिक जीवन का आधार

ब्रह्मचर्य....स्वस्थ वैवाहिक जीवन का आधार

ब्रह्मचर्य....स्वस्थ वैवाहिक जीवन का आधार, सुनने में ये वाक्य सचमुच कितना अजीब है क्योंकि जिस खुशहाल दाम्पत्य जीवन के लिए अच्छी सेक्सुअल लाइफ बहुत अनिवार्य है, उसमें भला ब्रह्मचर्य का पालन कैसे अपना अस्तित्व बनाए रख सकता है। लेकिन यहां ब्रह्मचर्य से तात्पर्य उस संयम व नियम से है जो वैवाहिक जीवन को स्वस्थ व खुशहाल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है।

सेक्सुअल रिलेशन से दाम्पत्य जीवन स्वस्थ व सुखी बना रहे, इसके लिए आयुर्वेद में कुछ नियमों का उल्लेख किया गया है। इन्हीं नियमों का पालन गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य कहलाता है।

आयुर्वेद में यौन संबंधों का महत्व- दाम्पत्य जीवन का अर्थ है दो अलग-अलग विचारधाराओं का मिलकर एक धारा में बहना। ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि जीवन से जुड़ी हर चीज़ में दोनों लोगों की खुशी व सहमति हो। दाम्पत्य जीवन का यह नियम यौन जीवन पर भी लागू होता है। तभी तो आयुर्वेद में भी दाम्पत्य जीवन को खुशहाल बनाने के लिए यौन गतिविधियों का वर्णन किया गया है। आयुर्वेद के अनुसार यौन गतिविधियों का उद्देश्य हमेशा आनंद या इंद्रिय सुख के लिए नहीं अपितु स्वस्थ व संस्कारी संतान के लिए है। इस दृष्टिकोण के लिहाज़ से पति-पत्नी दोनों को ही यौन संबंध बनाने के लिए शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक व आध्यात्मिक तौर पर तैयार होना चाहिए। दोनों को एक-दूसरे के प्रति परस्पर समर्पित रहना चाहिए, तभी इस रिश्ते का एक सकारात्मक नतीजा हासिल होता है। इसके अलावा आयुर्वेद के मुताबिक संतुलित व अनुशासित सेक्स स्वास्थ्य को गहराई से पोषित और विकसित करता है। लिहाज़ा दाम्पत्य जीवन में इस क्रिया का उपभोग करना आवश्यक है लेकिन यह किसी भी तरह से लोगों के लिए नुकसान का कारण ना बने, इसलिए इसमें कुछ नियमों का उल्लेख किया गया है जिनका पालन ना करने पर कई तरह के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

यौन संबंध के लिए आयुर्वेद के नियम:

  1. आयुर्वेद के मुताबिक यौन संबंध कभी भी ब्रह्म मुहूर्त में स्थापित नहीं करना चाहिए। इस वक्त का सेक्स स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है।
  2. शीत और वसंत ऋतु सेक्स संबंधों के लिए सबसे अनुकूल मानी गई है। गर्मी के मौसम में वात दोष में वृद्धि होती है और शरीर में ऊर्जा और बल की प्राकृतिक तौर पर कमी होती है। लिहाज़ा इस दौरान व्यक्ति को सेक्स प्रक्रिया को कम कर देना चाहिए।
  3. शारीरिक संबंध बनाने के पश्चात् शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है, इस कमी की पूर्ति के लिए आयुर्वेद में गुनगुना दूध पीने की सलाह दी जाती है।
  4. मासिक धर्म या किसी अन्य बीमारी के दौरान भी यौन संबंध बनाने से परहेज करना चाहिए।
  5. भोजन के तुरंत बाद, मानसिक अशांति, साथी की अस्वीकृति इत्यादि में भी यौन क्रिया नहीं करनी चाहिए।

अन्य टिप्स: आयुर्वेद में सेक्स से जुड़े कई और टिप्स भी बताए गए हैं, जैसे-

  1. प्राकृतिक रूप से ऐसे भोजन का सेवन करें जिससे आपकी कामोत्तेजना बढ़े और शरीर में शुक्र धातु का निर्माण प्रोत्साहित हो। ऐसी चीजों में घी, नारियल पानी, फल, सूखे मेवे, विशेष जड़ी-बूटियां और दूध शामिल हैं।
  2. नहाने से पहले तेल से अपने शरीर की मसाज करें।
  3. सेक्स क्रिया के बाद नहाना न भूलें और साफ और आरामदायक कपड़े पहनें।
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