शीर्षासन से हो लाभान्वित

सिर के बल किए जाने की वजह से इसे शीर्षासन कहते हैं। शीर्षासन एक ऐसा आसन है जिसके अभ्यास से हम सदैव कई बड़ी-बड़ी बीमारियों से दूर रहते हैं। हालांकि यह आसन काफी मुश्किल है। यह हर व्यक्ति के लिए सहज नहीं है। शीर्षासन से हमारा पाचनतंत्र अच्छा रहता है, रक्त संचार सुचारू रहता है। शरीर को बल प्राप्त होता है। शीर्षासन करने के लिए के सबसे पहले समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर वज्रासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों की कोहनियों को जमीन पर टिका दें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ लें। अब सिर को दोनों हथेलियों के मध्य धीरे-धीरे रखें। सांस सामान्य रखें। सिर को जमीन पर टिकाने के बाद धीरे-धीरे शरीर का पूरा वजन सिर छोड़ते हुए शरीर को ऊपर की उठाना शुरू करें। शरीर का भार सिर पर लें। शरीर को सीधा कर लें। बस यही अवस्था को शीर्षासन कहा जाता है। यह आसन सिर के बल किया जाता है इसलिए इसे शीर्षासन कहते हैं।

जितने भी योगाभ्यास है उसमें शीर्षासन को किंग कहा गया है।

शीर्षासन वजन के कंट्रोल में: 
इस योगाभ्यास के करने से थाइरोइड एवं पारा थाइरोइड अंतःस्रावी गंथियों को स्वस्थ बनाने में मदद मिलती है और हॉर्मोन का सही तरीके से स्राव होने लगता है। मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करता है और शरीर के वजन को बढ़ने से रोकता है।

शीर्षासन रोके बालों का गिरना: शीर्षासन बालों को सुंदर बनाता है। शीर्षासन अभ्यास से मस्तिष्क वाले भाग में ऑक्सीजन का प्रवाह अधिक हो जाता है और मस्तिष्क को उपयुक्त पोषक तत्व पहुँचता है। शीर्षासन न केवल बालों के झड़ने को ही नहीं रोकता बल्कि बालों से सम्बंधित और समस्याओं जैसे काले व घने बाल, लम्बे बाल, बालों का कम झरना, बालों को सफेद होने से रोकना इत्यादि में काम आता है।

त्वचा के निखार में शीर्षासन:
 यह आपके त्वचा को मुलायम, खूबसूरत और ग्लोइंग प्रदान करता है। इसके अभ्यास से चेहरे वाले हिस्से में खून का बहाव अच्छा हो जाता है और शरीर के पुरे अग्र भाग में पोषक तत्व सही रूप में पहुँच पाता है।

शीर्षासन मेमोरी बढ़ाने में:
 इस आसन के अभ्यास से सिर में रक्त का प्रवाह बढ़ता है जिससे स्मृति बढ़ती है।

शीर्षासन तंत्रिका तंत्र के लिए:
 यह आसन तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है।शीर्षासन अंतःस्रावी गंथियों के लिए: यह आसन पिटुइटरी ग्रन्थि को स्वस्थ रखता है और इसके हॉर्मोन स्राव में मदद करता है। चूंकि शीर्षासन मास्टर ग्लैंड है इसलिए यह सभी अंतःस्रावी गंथियों को विनियमित करता है।

शीर्षासन पाचन तंत्र के लिए:
 यह पाचन तंत्र को मजबूत करते हुए पाचन के लिए लाभकारी है।

यकृत के स्वस्थ के लिए शीर्षासन:
 यह योगाभ्यास यकृत एवं प्लीहा के रोगों में लाभप्रद है।

एकाग्रता को बढ़ाने के लिए शीर्षासन:
 यह एकाग्रता की क्षमता बढ़ाता है तथा अनिद्रा में सहायक है।

शीर्षासन की सावधानी

जिनको उच्च रक्तचाप हो उन्हें यह आसन नहीं करनी चाहिए।हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इस आसन के करने से बचना चाहिए।सर्वाइकल स्पॉण्डिलाइटिस के रोगियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।अत्यधिक जुकाम के हालात में इस आसन को न करें। कान बहने की शिकायत होने पर भी इस आसन के करने से बचना चाहिए।आरंभ में कम अवधि के लिए यह आसन करना चाहिए।
शुरुआत में शीर्षासन को किसी कुशल योग प्रशिक्षक के सानिद्रा में ही करना चाइये।
योग प्रशिक्षक
                 -बी. एन. भारती(राज)
                     09412345621

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