वह जो आदमी है न - हरिशंकर परसाई

लेखक: 
हरिशंकर परसाई

निंदा में विटामिन और प्रोटीन होते हैं। निंदा खून साफ करती है, पाचन-क्रिया ठीक करती है, बल और स्फूर्ति देती है। निंदा से मांसपेशियाँ पुष्ट होती हैं। निंदा पायरिया का तो शर्तिया इलाज है। संतों को परनिंदा की मनाही होती है, इसलिए वे स्वनिंदा करके स्वास्थ्य अच्छा रखते हैं। ‘मौसम कौन कुटिल खल कामी’- यह संत की विनय और आत्मग्लानि नहीं है, टॉनिक है। संत बड़ा कांइयाँ होता है। हम समझते हैं, वह आत्मस्वीकृति कर रहा है, पर वास्तव में वह विटामिन और प्रोटीन खा रहा है। Read More : वह जो आदमी है न - हरिशंकर परसाई about वह जो आदमी है न - हरिशंकर परसाई

नवरात्रि महोत्सव शुभारंभ विशेष:

इस साल शरद नवरात्रि का शुभारंभ चित्रा नक्षत्र में मां जगदम्बे के नाव पर आगमन से शुरू हो रहा है। 
इस बार प्रतिपदा और द्वितीया तिथि एक साथ होने से मां शैलपुत्री  और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा एक  दिन होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 10 अक्टूबर को प्रतिपदा और द्वितीया माना जा रहा है।   
पहला और दूसरा नवरात्र दस अक्तूबर को है। दूसरी तिथि का क्षय माना गया है। अर्थात शैलपुत्री और ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना एक ही दिन होगी। इस बार पंचमी तिथि में वृद्धि है। 13 और 14 अक्तूबर दोनों दिन पंचमी रहेगी। पंचमी तिथि स्कंदमाता का दिन है। Read More : नवरात्रि महोत्सव शुभारंभ विशेष: about नवरात्रि महोत्सव शुभारंभ विशेष:

पवित्रता का दौरा - हरिशंकर परसाई

लेखक: 
हरिशंकर परसाई

सुबह की डाक से चिट्ठी मिली, उसने मुझे इस अहंकार में दिन-भर उड़ाया कि मैं पवित्र आदमी हूँ क्योंकि साहित्य का काम एक पवित्र काम है। दिन-भर मैंने हर मिलनेवाले को तुच्छ समझा। मैं हर आदमी को अपवित्र मानकर उससे अपने को बचाता रहा। पवित्रता ऐसी कायर चीज है कि सबसे डरती है और सबसे अपनी रक्षा के लिए सचेत रहती है। अपने पवित्र होने का एहसास आदमी को ऐसा मदमाता है कि वह उठे हुए साँड़ की तरह लोगों को सींग मारता है, ठेले उलटाता है, बच्चों को रगेदता है। पवित्रता की भावना से भरा लेखक उस मोर जैसा होता है जिसके पाँव में घुँघरू बाँध दिए गए हों। वह इत्र की ऐसी शीशी है जो गंदी नाली के किनारे की दुकान पर रखी है। यह Read More : पवित्रता का दौरा - हरिशंकर परसाई about पवित्रता का दौरा - हरिशंकर परसाई

नया साल - हरिशंकर परसाई

लेखक: 
हरिशंकर परसाई

साधो, बीता साल गुजर गया और नया साल शुरू हो गया। नए साल के शुरू में शुभकामना देने की परंपरा है। मैं तुम्हें शुभकामना देने में हिचकता हूँ। बात यह है साधो कि कोई शुभकामना अब कारगर नहीं होती। मान लो कि मैं कहूँ कि ईश्वर नया वर्ष तुम्हारे लिए सुखदायी करें तो तुम्हें दुख देनेवाले ईश्वर से ही लड़ने लगेंगे। ये कहेंगे, देखते हैं, तुम्हें ईश्वर कैसे सुख देता है। साधो, कुछ लोग ईश्वर से भी बड़े हो गए हैं। ईश्वर तुम्हें सुख देने की योजना बनाता है, तो ये लोग उसे काटकर दुख देने की योजना बना लेते हैं। Read More : नया साल - हरिशंकर परसाई about नया साल - हरिशंकर परसाई

पार्टनर के साथ इंटिमेट होने से पहले ये चीजें चैक लें कहीं....

पार्टनर के साथ इंटिमेट होने से पहले ये चीजें चैक लें कहीं....

आजकल चाहे महिला हो या फिर पुरुष इंटिमेट होने में ज़रा भी नही सोचते। अगर वो प्यार में हैं तो ये सब उनके लिए आम होता है जो उन्हें लगता है। लेकिन कई बार इंटिमेट होने में हम गलतियां भी कर देते हैं जिनके बारे में बाद में सोचने से कोई फायदा नही रहता। 

 

इंटिमेट होते हैं तो ये जरूर ध्यान दें: Read More : पार्टनर के साथ इंटिमेट होने से पहले ये चीजें चैक लें कहीं.... about पार्टनर के साथ इंटिमेट होने से पहले ये चीजें चैक लें कहीं....

जैसे उनके दिन फिरे - हरिशंकर परसाई

लेखक: 
हरिशंकर परसाई

एक था राजा। राजा के चार लड़के थे। रानियाँ? रानियाँ तो अनेक थीं, महल में एक 'पिंजरापोल' ही खुला था। पर बड़ी रानी ने बाकी रानियों के पुत्रों को जहर देकर मार डाला था। और इस बात से राजा साहब बहुत प्रसन्न हुए थे। क्योंकि वे नीतिवान थे और जानते थे कि चाणक्य का आदेश है, राजा अपने पुत्रों को भेड़िया समझे। बड़ी रानी के चारों लड़के जल्दी ही राजगद्दी पर बैठना चाहते थे, इसलिए राजा साहब को बूढ़ा होना पड़ा। Read More : जैसे उनके दिन फिरे - हरिशंकर परसाई about जैसे उनके दिन फिरे - हरिशंकर परसाई

अपनी अपनी बीमारी - हरिशंकर परसाई

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हरिशंकर परसाई

हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप गए। चंदा माँगनेवाले और देनेवाले एक-दूसरे के शरीर की गंध बखूबी पहचानते हैं। लेनेवाला गंध से जान लेता है कि यह देगा या नहीं। देनेवाला भी माँगनेवाले के शरीर की गंध से समझ लेता है कि यह बिना लिए टल जाएगा या नहीं। हमें बैठते ही समझ में आ गया कि ये नहीं देंगे। वे भी शायद समझ गए कि ये टल जाएँगे। फिर भी हम दोनों पक्षों को अपना कर्तव्य तो निभाना ही था। हमने प्रार्थना की तो वे बोले - आपको चंदे की पड़ी है, हम तो टैक्सों के मारे मर रहे हैं। सोचा, यह टैक्स की बीमारी कैसी होती है। बीमारियाँ बहुत दे Read More : अपनी अपनी बीमारी - हरिशंकर परसाई about अपनी अपनी बीमारी - हरिशंकर परसाई

भोलाराम का जीव - हरिशंकर परसाई

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हरिशंकर परसाई

ऐसा कभी नहीं हुआ था. धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफ़ारिश के आधार पर स्वर्ग या नरक में निवास-स्थान 'अलॉट' करते आ रहे थे. पर ऐसा कभी नहीं हुआ था.

सामने बैठे चित्रगुप्त बार-बार चश्मा पोंछ, बार-बार थूक से पन्ने पलट, रजिस्टर पर रजिस्टर देख रहे थे. गलती पकड़ में ही नहीं आ रही थी. आखिर उन्होंने खीझ कर रजिस्टर इतने जोर से बन्द किया कि मक्खी चपेट में आ गई. उसे निकालते हुए वे बोले - "महाराज, रिकार्ड सब ठीक है. भोलाराम के जीव ने पाँच दिन पहले देह त्यागी और यमदूत के साथ इस लोक के लिए रवाना भी हुआ, पर यहाँ अभी तक नहीं पहुँचा." Read More : भोलाराम का जीव - हरिशंकर परसाई about भोलाराम का जीव - हरिशंकर परसाई

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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