भारत के नए IT नियम से UN को अपत्ति

भारत के नए IT नियम से UN को अपत्ति

भारत के नए IT नियम से UN को अपत्ति:नए नियम से सरकार आम यूजर्स का डाटा मैनेज करेगी, बोलने की स्वतंत्रता नहीं रहेगी; सरकार का कहना डेटा का इस्तेमाल हिंसा रोकने के लिए किया जाएगा

तीन स्पेशल मैसेंजर ने यूनाइटेड नेशन की ओर से 11 जून को भारत सरकार को एक लेटर पोस्ट किया है। जिसमें कहा गया है कि भारत में लागू , नए IT नियम इंटरनेशनल मानव अधिकार का पालन नहीं करते हैं। इसे बोलने की स्वतंत्रता का प्रचार और बचाव करने वाले आइरीन खान, क्लेमेंट न्याले तोसी वौले और निजता के अधिकार पर काम करने वाले जोसेफ कैनाटासी ने पोस्ट किया है।

इनका कहना है कि इस नियम में मोरल वैल्यू नहीं है। जो कि बच्चों के लिए हार्मफुल है। भारत की एकता के लिए खतरनाक है। जिसे लोगों को बहकाने और उकसाने के लिए लाया गया है। इस नियम को पर्याप्त तरीके स्पष्ट नहीं किया गया है,जो कि गलत है।

मानव अधिकार समझौते का पालन नहीं करते IT नियम
भारत के नए IT नियम मानव अधिकार समझौते के तहत इंटरनेशनल नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के नियम (ICCPR) का उल्लंघन करते हैं। ICCPR के आर्टिकल 19 (3) में बोलने और खुद के विचार रखने की फ्रीडम होती है। जो कि नेशनल सिक्योरिटी और पब्लिक आर्डर या पब्लिक हेल्थ और नैतिकता के लिए है। कहा जा रहा है कि नए IT नियम से ये सारी चीजें रुक रही हैं।

इससे आम यूजर्स का डाटा सरकार मैनेज करेगी
स्पेशल मैसेंजर्स का कहना है कि बोलने की स्वतंत्रता कानून के बावजूद कंपनी को मॉनिटर करके तेजी से यूजर्स जनरेटेड कंटेंट को हटाया जा रहा है। इससे बोलने की स्वतंत्रता चली जाती है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म में कंटेंट को हटाने वाला सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यूजर्स और कंपनी के बीच में काम करने वाले इसका गलत फायदा उठा सकते हैं।

भारत सरकार और वॉट्सऐप में विवाद जारी है
वॉट्सऐप वाली इंक्रिप्शन टेक्नोलॉजी को लेकर भारत सरकार और वॉट्सऐप में विवाद है। पिछले महीने वॉट्सऐप ने IT नियम का विरोध किया था। आरोप लगाया था कि इससे यूजर्स के निजता का अधिकार खतरे में है। UN शुरू से ही एन्क्रिप्शन को सपोर्ट करता रहा है। इनका मानना है कि यह एक प्रभावी टेक्निकल सेफगार्ड है। इससे निजता के अधिकार की सुरक्षा होती है।

हिंसा को रोकने के लिए सरकार डेटा लेती है
जब कोई हिंसा या भारत की यूनिटी को नुकसान पहुंचाने वाले मैसेज वायरल होते हैं। किसी महिला को गलत दिखाया जा रहा हो या बच्चों से रिलेटेड सेक्सुअल इश्यू की पड़ताल करनी होती है तो इसका इस्तेमाल किया जाता है। ताकि मैसेज को किसने और किस मकसद से फैलाया है इसका पता लगाया जा सके।

ट्रेसेब्लिटी के नियम को लेकर वॉट्सऐप और भारत सरकार में तनाव की स्थिति है। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को यूजर्स की प्राइवेसी के लिए बनाया गया है। सरकार का तर्क है कि उन्हें सभी यूजर्स के मैसेज को पढ़ने को मिले तो वह सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले का आसानी से पता लगा लेंगे।

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