पीलिया में फिटकरी

पीलिया रोग परिचय 

इस रोग में शरीर की चमड़ी चार्म का रंग पीला नजर आने लगता है। रोगी की आँखों तथा नाखूनों का रंग पीला पड़ जाता है। मूत्र भी पिले रंग आने लगता है। यह रोग जब अत्यधिक बढ़ जाता है, तब रोगी को सब कुछ पीला ही पीला नजर आने लगता है। यंहा तक की रोगी का पसीना भी पिले रंग का दीखता है। यही रोग पीलिया, पाण्डु, कामला, जॉन्डिस के नाम से जाना जाता है।

पीलिया के रामबाण १६ उपाय

१) फिटकरी को बारीक़ भूनकर पीसकर बोतल में भर लें। इसे १ से ३ ग्राम की मात्रा में २० ग्राम दही के साथ मिलाकर सेवन करें। दिन में कईबार केवल दही खाते रहे। यदि दही उपलब्ध न हो तो छाछ लें। एक सप्ताह में रोगी का इलाज हो जायेगा।

२) सफेद चन्दन ५ ग्राम, आँवा हल्दी पीसी हुई ६ ग्राम, दोनों को शहद में मिलाकर सात दिन चखते रहे।

३) कलमी शोरा १० ग्राम, मिश्री ५० ग्राम, दोनों को खरल करके बारीक़ करले। इसे ३ से ६ ग्राम तक की मात्रा में दिन में ३ बार पानी के साथ सेवन करें। इसके प्रयोग से पाण्डु रोग, मूत्र जलन तथा पेशाब का रुक-रूककर आना ठीक हो जाता है।

४) मूली के हरे रंग का रस ४५० ग्राम में चीनी इतनी मिला लें की रस मीठा हो जाये। तदुपरांत मल-मलके कपड़े से छानकर रोगी को पीला दें। पिटे ही तुरंत लाभ होगा। मात्र सात दिन में रोग जड़ से नष्ट हो जाएगा।

 

५) कड़वी तोरई का रस २-३ बून्द नक् में चढ़ा लें। दवा अंदर जाते ही पिले रंग का पानी निकलना प्रारम्भ हो जायेगा। पानी निकलकर रोगी की तब्येत ठीक होनी लगती है।

नोट:- यह दवा बहुत अधिक तेज़ है। कोमल प्रकृति वालों को सेवन कदापि न कराएं। यदि नाक में अधिक जलन महसूस हो तो बाद में गौघृत की नस्य लें। यदि तजा कड़वी तोरई उपलब्ध न हो तो सुखी तोरई का टुकड़ा रातभर पानी में भिगोकर उस पानी का प्रयोग करें।

६) फिटकरी एलम कच्ची २० ग्राम बारीक़ पीसकर २१ पूड़ियाँ बनाकर प्रतिदिन एक पूड़ियाँ मक्खन के साथ सेवन करें। पुराने से पुराने पाण्डु रोग का घरेलु इलाज हो जायेगा।

७) बढ़िया सफेद फिटकरी भूनकर बारीक़ पीकर किसी साफ शीशी में सुरक्षित रख लें। यदि पाण्डु रोग १ मास से अधिक समय का है तो प्रथम दिन १ ग्राम, दूसरे दिन २ ग्राम, तीसरे दिन ३ ग्राम तदुपरांत ३ ग्राम नित्य दवा फॉंक कर ऊपर से दही का एक प्याला दिन करे। मात्र ७ दिनों में ही पीलिया का उपचार हो जाएगा।

८) अरंड के पत्तों का रस १० से २० ग्राम तक गाय के कच्चे दूध में मिलाकर रोज सुबह-शाम दिन में तीन बार पिए।

नोट:- इस उपचार के प्रयोग से यदि किसी को दस्त आने लग जाये तब भी चिंता न करे। दही और चावल कहते रहे। उससे दस्त साफ न होता हो तो उसे अधिक दूध अधिक खिलाए। रोटी बिलकुल ही न दें।

९) गिलोय के अर्क ५० ग्राम में २० ग्राम शहद मिलाकर पीना पीलिया रोग में परम लाभकारी है।

१०) नींबू का रस १० ग्राम, खॉंड़ २० ग्राम, खाने का सोडा ४ रत्ती, नौसादर २ रत्ती का मिश्रण १० ग्राम पानी में मिलाकर दिन में २ बार प्रातः सायं पियें।

११) आक के पत्ते २५ नग, वजन में जितने पत्ते है उतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर खरल में ३ दिनों तक इतना घोंटें की दोनों बिलकुल सुरमे की भांति हो जाए। इसे २ ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें।

१२) टमाटर के १०० ग्राम के रस में ३ ग्राम काला नमक मिलाकर सुबह शाम खाये।

१३) पाण्डु रोग जो यकृत की पित्त निकालने वाली नली Bile डक्ट के रुकने से होता है। उसके लिए निम्न प्रयोग जो ‘धन्वंतरि गुप्त सिद्ध प्रयोगांक’ से लिया है तथा कभी निष्फल नहीं होता है।

नोट:- अन्य किसी कारन से उत्पन्न में इस योग से कोई भी लाभ नहीं होता है तो यह आजमाएं। यह उपचार अत्यंत साधारण है किन्तु शीग्र लाभ करता है।

प्रातःकाल एक घरेलु मक्खी पकड़कर उसे गुड़ में लपेटकर उसे रोगी को निगलवा दे। बस यही दवा है। पाण्डु रोगी जिसका शरीर पीला पद गया हो नेत्र व मूत्रदि पिले हो गए हो, पिंडलियों में दर्द हो, उसे इस नुश्खे से तत्काल लाभ होता है। प्रथम दिन से ही मूत्र सफेद आना लगता है और नेत्रों का पीलापनkm हो जाता है। दूसरे ही दिन रोगी अपने अंदर उत्साह अनुभव करने लगता है तथा तीसरे दिन रोगी मुक्त हो जाता है।  यह उपचार प्रतिदिन एक बार केवल प्रातःकाल ही ३ दिन तक करें। लाभप्रद कभी निष्फल नहीं होने वाला योग है। किन्तु रोगी से इस योग को पूर्णतः छिपाकर सेवन कराएं ताकि इस से घृणा न हो।

१४) हल्दी के महीन चूर्ण ६ ग्राम को

मट्ठा में मिलाकर सेवन करें। पत्थ में दही भात खाएं।

१५) नौसादर, सुहागे का फूल, पंचलवन २०-२० ग्राम तथा चित्रक-मूल, पीपलामूल, त्रिकूट, भुना जीरा, अजवायन, लोह भस्म प्रत्येक १०-१० ग्राम गुड़ एवं १५० ग्राम को परस्पर कूटकर मिलालें। फिर अमृतवान में भरकर सुरक्षित जगह पर रखें। १५ दिनों तक धुप में रखे। तदुपरांत छानकर बोतल में भर लें। मात्रा ६ माशे से १ तोला तक दिन में दो बार भोजन के बाद ढाई तोला पानी के साथ लें। यह द्रव्य (पेय) उदर रोग, प्लीहा, यकृत दोष, पाण्डु, स्त्रियों के गर्भाशय दोष, कब्ज और उदर शूल इत्यादि रोगों को थोड़े ही दिनों में नष्ट कर देता है।

१६) एरंड के पत्तों का रस १० ग्राम दूध के साथ मिलाकर नित्य प्रातःकाल ५ दिनों तक पिलाने से गर्भवती को होने वाली कामला की प्रारम्भिक अवस्था में लाभ होता है।

 

पीलिया रोग परिचय 

इस रोग में शरीर की चमड़ी चार्म का रंग पीला नजर आने लगता है। रोगी की आँखों तथा नाखूनों का रंग पीला पड़ जाता है। मूत्र भी पिले रंग आने लगता है। यह रोग जब अत्यधिक बढ़ जाता है, तब रोगी को सब कुछ पीला ही पीला नजर आने लगता है। यंहा तक की रोगी का पसीना भी पिले रंग का दीखता है। यही रोग पीलिया, पाण्डु, कामला, जॉन्डिस के नाम से जाना जाता है।

पीलिया के रामबाण १६ उपाय

१) फिटकरी को बारीक़ भूनकर पीसकर बोतल में भर लें। इसे १ से ३ ग्राम की मात्रा में २० ग्राम दही के साथ मिलाकर सेवन करें। दिन में कईबार केवल दही खाते रहे। यदि दही उपलब्ध न हो तो छाछ लें। एक सप्ताह में रोगी का इलाज हो जायेगा।

२) सफेद चन्दन ५ ग्राम, आँवा हल्दी पीसी हुई ६ ग्राम, दोनों को शहद में मिलाकर सात दिन चखते रहे।

३) कलमी शोरा १० ग्राम, मिश्री ५० ग्राम, दोनों को खरल करके बारीक़ करले। इसे ३ से ६ ग्राम तक की मात्रा में दिन में ३ बार पानी के साथ सेवन करें। इसके प्रयोग से पाण्डु रोग, मूत्र जलन तथा पेशाब का रुक-रूककर आना ठीक हो जाता है।

४) मूली के हरे रंग का रस ४५० ग्राम में चीनी इतनी मिला लें की रस मीठा हो जाये। तदुपरांत मल-मलके कपड़े से छानकर रोगी को पीला दें। पिटे ही तुरंत लाभ होगा। मात्र सात दिन में रोग जड़ से नष्ट हो जाएगा।

 

५) कड़वी तोरई का रस २-३ बून्द नक् में चढ़ा लें। दवा अंदर जाते ही पिले रंग का पानी निकलना प्रारम्भ हो जायेगा। पानी निकलकर रोगी की तब्येत ठीक होनी लगती है।

नोट:- यह दवा बहुत अधिक तेज़ है। कोमल प्रकृति वालों को सेवन कदापि न कराएं। यदि नाक में अधिक जलन महसूस हो तो बाद में गौघृत की नस्य लें। यदि तजा कड़वी तोरई उपलब्ध न हो तो सुखी तोरई का टुकड़ा रातभर पानी में भिगोकर उस पानी का प्रयोग करें।

६) फिटकरी एलम कच्ची २० ग्राम बारीक़ पीसकर २१ पूड़ियाँ बनाकर प्रतिदिन एक पूड़ियाँ मक्खन के साथ सेवन करें। पुराने से पुराने पाण्डु रोग का घरेलु इलाज हो जायेगा।

७) बढ़िया सफेद फिटकरी भूनकर बारीक़ पीकर किसी साफ शीशी में सुरक्षित रख लें। यदि पाण्डु रोग १ मास से अधिक समय का है तो प्रथम दिन १ ग्राम, दूसरे दिन २ ग्राम, तीसरे दिन ३ ग्राम तदुपरांत ३ ग्राम नित्य दवा फॉंक कर ऊपर से दही का एक प्याला दिन करे। मात्र ७ दिनों में ही पीलिया का उपचार हो जाएगा।

८) अरंड के पत्तों का रस १० से २० ग्राम तक गाय के कच्चे दूध में मिलाकर रोज सुबह-शाम दिन में तीन बार पिए।

नोट:- इस उपचार के प्रयोग से यदि किसी को दस्त आने लग जाये तब भी चिंता न करे। दही और चावल कहते रहे। उससे दस्त साफ न होता हो तो उसे अधिक दूध अधिक खिलाए। रोटी बिलकुल ही न दें।

९) गिलोय के अर्क ५० ग्राम में २० ग्राम शहद मिलाकर पीना पीलिया रोग में परम लाभकारी है।

१०) नींबू का रस १० ग्राम, खॉंड़ २० ग्राम, खाने का सोडा ४ रत्ती, नौसादर २ रत्ती का मिश्रण १० ग्राम पानी में मिलाकर दिन में २ बार प्रातः सायं पियें।

११) आक के पत्ते २५ नग, वजन में जितने पत्ते है उतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर खरल में ३ दिनों तक इतना घोंटें की दोनों बिलकुल सुरमे की भांति हो जाए। इसे २ ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें।

१२) टमाटर के १०० ग्राम के रस में ३ ग्राम काला नमक मिलाकर सुबह शाम खाये।

१३) पाण्डु रोग जो यकृत की पित्त निकालने वाली नली Bile डक्ट के रुकने से होता है। उसके लिए निम्न प्रयोग जो ‘धन्वंतरि गुप्त सिद्ध प्रयोगांक’ से लिया है तथा कभी निष्फल नहीं होता है।

नोट:- अन्य किसी कारन से उत्पन्न में इस योग से कोई भी लाभ नहीं होता है तो यह आजमाएं। यह उपचार अत्यंत साधारण है किन्तु शीग्र लाभ करता है।

प्रातःकाल एक घरेलु मक्खी पकड़कर उसे गुड़ में लपेटकर उसे रोगी को निगलवा दे। बस यही दवा है। पाण्डु रोगी जिसका शरीर पीला पद गया हो नेत्र व मूत्रदि पिले हो गए हो, पिंडलियों में दर्द हो, उसे इस नुश्खे से तत्काल लाभ होता है। प्रथम दिन से ही मूत्र सफेद आना लगता है और नेत्रों का पीलापनkm हो जाता है। दूसरे ही दिन रोगी अपने अंदर उत्साह अनुभव करने लगता है तथा तीसरे दिन रोगी मुक्त हो जाता है।  यह उपचार प्रतिदिन एक बार केवल प्रातःकाल ही ३ दिन तक करें। लाभप्रद कभी निष्फल नहीं होने वाला योग है। किन्तु रोगी से इस योग को पूर्णतः छिपाकर सेवन कराएं ताकि इस से घृणा न हो।

१४) हल्दी के महीन चूर्ण ६ ग्राम को

मट्ठा में मिलाकर सेवन करें। पत्थ में दही भात खाएं।

१५) नौसादर, सुहागे का फूल, पंचलवन २०-२० ग्राम तथा चित्रक-मूल, पीपलामूल, त्रिकूट, भुना जीरा, अजवायन, लोह भस्म प्रत्येक १०-१० ग्राम गुड़ एवं १५० ग्राम को परस्पर कूटकर मिलालें। फिर अमृतवान में भरकर सुरक्षित जगह पर रखें। १५ दिनों तक धुप में रखे। तदुपरांत छानकर बोतल में भर लें। मात्रा ६ माशे से १ तोला तक दिन में दो बार भोजन के बाद ढाई तोला पानी के साथ लें। यह द्रव्य (पेय) उदर रोग, प्लीहा, यकृत दोष, पाण्डु, स्त्रियों के गर्भाशय दोष, कब्ज और उदर शूल इत्यादि रोगों को थोड़े ही दिनों में नष्ट कर देता है।

१६) एरंड के पत्तों का रस १० ग्राम दूध के साथ मिलाकर नित्य प्रातःकाल ५ दिनों तक पिलाने से गर्भवती को होने वाली कामला की प्रारम्भिक अवस्था में लाभ होता है।

पीलिया रोग परिचय 

इस रोग में शरीर की चमड़ी चार्म का रंग पीला नजर आने लगता है। रोगी की आँखों तथा नाखूनों का रंग पीला पड़ जाता है। मूत्र भी पिले रंग आने लगता है। यह रोग जब अत्यधिक बढ़ जाता है, तब रोगी को सब कुछ पीला ही पीला नजर आने लगता है। यंहा तक की रोगी का पसीना भी पिले रंग का दीखता है। यही रोग पीलिया, पाण्डु, कामला, जॉन्डिस के नाम से जाना जाता है।

पीलिया के रामबाण १६ उपाय

१) फिटकरी को बारीक़ भूनकर पीसकर बोतल में भर लें। इसे १ से ३ ग्राम की मात्रा में २० ग्राम दही के साथ मिलाकर सेवन करें। दिन में कईबार केवल दही खाते रहे। यदि दही उपलब्ध न हो तो छाछ लें। एक सप्ताह में रोगी का इलाज हो जायेगा।

२) सफेद चन्दन ५ ग्राम, आँवा हल्दी पीसी हुई ६ ग्राम, दोनों को शहद में मिलाकर सात दिन चखते रहे।

३) कलमी शोरा १० ग्राम, मिश्री ५० ग्राम, दोनों को खरल करके बारीक़ करले। इसे ३ से ६ ग्राम तक की मात्रा में दिन में ३ बार पानी के साथ सेवन करें। इसके प्रयोग से पाण्डु रोग, मूत्र जलन तथा पेशाब का रुक-रूककर आना ठीक हो जाता है।

४) मूली के हरे रंग का रस ४५० ग्राम में चीनी इतनी मिला लें की रस मीठा हो जाये। तदुपरांत मल-मलके कपड़े से छानकर रोगी को पीला दें। पिटे ही तुरंत लाभ होगा। मात्र सात दिन में रोग जड़ से नष्ट हो जाएगा।

 

५) कड़वी तोरई का रस २-३ बून्द नक् में चढ़ा लें। दवा अंदर जाते ही पिले रंग का पानी निकलना प्रारम्भ हो जायेगा। पानी निकलकर रोगी की तब्येत ठीक होनी लगती है।

नोट:- यह दवा बहुत अधिक तेज़ है। कोमल प्रकृति वालों को सेवन कदापि न कराएं। यदि नाक में अधिक जलन महसूस हो तो बाद में गौघृत की नस्य लें। यदि तजा कड़वी तोरई उपलब्ध न हो तो सुखी तोरई का टुकड़ा रातभर पानी में भिगोकर उस पानी का प्रयोग करें।

६) फिटकरी एलम कच्ची २० ग्राम बारीक़ पीसकर २१ पूड़ियाँ बनाकर प्रतिदिन एक पूड़ियाँ मक्खन के साथ सेवन करें। पुराने से पुराने पाण्डु रोग का घरेलु इलाज हो जायेगा।

७) बढ़िया सफेद फिटकरी भूनकर बारीक़ पीकर किसी साफ शीशी में सुरक्षित रख लें। यदि पाण्डु रोग १ मास से अधिक समय का है तो प्रथम दिन १ ग्राम, दूसरे दिन २ ग्राम, तीसरे दिन ३ ग्राम तदुपरांत ३ ग्राम नित्य दवा फॉंक कर ऊपर से दही का एक प्याला दिन करे। मात्र ७ दिनों में ही पीलिया का उपचार हो जाएगा।

८) अरंड के पत्तों का रस १० से २० ग्राम तक गाय के कच्चे दूध में मिलाकर रोज सुबह-शाम दिन में तीन बार पिए।

नोट:- इस उपचार के प्रयोग से यदि किसी को दस्त आने लग जाये तब भी चिंता न करे। दही और चावल कहते रहे। उससे दस्त साफ न होता हो तो उसे अधिक दूध अधिक खिलाए। रोटी बिलकुल ही न दें।

९) गिलोय के अर्क ५० ग्राम में २० ग्राम शहद मिलाकर पीना पीलिया रोग में परम लाभकारी है।

१०) नींबू का रस १० ग्राम, खॉंड़ २० ग्राम, खाने का सोडा ४ रत्ती, नौसादर २ रत्ती का मिश्रण १० ग्राम पानी में मिलाकर दिन में २ बार प्रातः सायं पियें।

११) आक के पत्ते २५ नग, वजन में जितने पत्ते है उतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर खरल में ३ दिनों तक इतना घोंटें की दोनों बिलकुल सुरमे की भांति हो जाए। इसे २ ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें।

१२) टमाटर के १०० ग्राम के रस में ३ ग्राम काला नमक मिलाकर सुबह शाम खाये।

१३) पाण्डु रोग जो यकृत की पित्त निकालने वाली नली Bile डक्ट के रुकने से होता है। उसके लिए निम्न प्रयोग जो ‘धन्वंतरि गुप्त सिद्ध प्रयोगांक’ से लिया है तथा कभी निष्फल नहीं होता है।

नोट:- अन्य किसी कारन से उत्पन्न में इस योग से कोई भी लाभ नहीं होता है तो यह आजमाएं। यह उपचार अत्यंत साधारण है किन्तु शीग्र लाभ करता है।

प्रातःकाल एक घरेलु मक्खी पकड़कर उसे गुड़ में लपेटकर उसे रोगी को निगलवा दे। बस यही दवा है। पाण्डु रोगी जिसका शरीर पीला पद गया हो नेत्र व मूत्रदि पिले हो गए हो, पिंडलियों में दर्द हो, उसे इस नुश्खे से तत्काल लाभ होता है। प्रथम दिन से ही मूत्र सफेद आना लगता है और नेत्रों का पीलापनkm हो जाता है। दूसरे ही दिन रोगी अपने अंदर उत्साह अनुभव करने लगता है तथा तीसरे दिन रोगी मुक्त हो जाता है।  यह उपचार प्रतिदिन एक बार केवल प्रातःकाल ही ३ दिन तक करें। लाभप्रद कभी निष्फल नहीं होने वाला योग है। किन्तु रोगी से इस योग को पूर्णतः छिपाकर सेवन कराएं ताकि इस से घृणा न हो।

१४) हल्दी के महीन चूर्ण ६ ग्राम को

मट्ठा में मिलाकर सेवन करें। पत्थ में दही भात खाएं।

१५) नौसादर, सुहागे का फूल, पंचलवन २०-२० ग्राम तथा चित्रक-मूल, पीपलामूल, त्रिकूट, भुना जीरा, अजवायन, लोह भस्म प्रत्येक १०-१० ग्राम गुड़ एवं १५० ग्राम को परस्पर कूटकर मिलालें। फिर अमृतवान में भरकर सुरक्षित जगह पर रखें। १५ दिनों तक धुप में रखे। तदुपरांत छानकर बोतल में भर लें। मात्रा ६ माशे से १ तोला तक दिन में दो बार भोजन के बाद ढाई तोला पानी के साथ लें। यह द्रव्य (पेय) उदर रोग, प्लीहा, यकृत दोष, पाण्डु, स्त्रियों के गर्भाशय दोष, कब्ज और उदर शूल इत्यादि रोगों को थोड़े ही दिनों में नष्ट कर देता है।

१६) एरंड के पत्तों का रस १० ग्राम दूध के साथ मिलाकर नित्य प्रातःकाल ५ दिनों तक पिलाने से गर्भवती को होने वाली कामला की प्रारम्भिक अवस्था में लाभ होता है।

 

 

 

पीलिया होने पर घरेलु इलाज

पीलिया होने पर घरेलु इलाज

पाचन तंत्र कमजोर होना पीलिया का प्रमुख कारण है। पीलिया(Jaundice) के रोग का प्रभाव शरीर में खून बनने पर पड़ता है जिससे शरीर में ब्लड की कमी होने लगती है। इस रोग में अगर लापरवाही की जाये तो ये काला पीलिया बन जाता है जो जानलेवा रोग हो सकता है। पीलिया पुराना हो या नया घरेलू देसी नुस्खे और आयुर्वेदिक दवा से आप इसका उपचार कर सकते है। इस बीमारी से छुटकारा पाने में इलाज के साथ परहेज करना भी जरुरी है और जैसे ही पीलिये के लक्षण आपको दिखने लगे इसका उपचार शुरू करे। पीलिया तीन तरह का होता है, हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया), हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस ए। इस लेख में हम जानेंगे  Read More : पीलिया होने पर घरेलु इलाज about पीलिया होने पर घरेलु इलाज

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

  • सेक्स कैसे करें
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