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बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत

 बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत

चार दशकों तक अपने संगीत सागर में श्रोताओं को डुबकी लगवाने वाले बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत- दोनों जगह अपनी धाक जमाई। Read More : बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत about बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत

क्यों पंडित रविशंकर ने एक ही गायिका से गवा दिए थे फिल्म के सभी गाने?

Vani Jairam

गुलजार की फिल्म मीरा भले ही सफल नहीं रही लेकिन उसका संगीत लाजवाब था. सत्तर का दशक आते-आते गुलजार साहब का फिल्म इंडस्ट्री में काफी नाम हो चुका था. बतौर गीतकार वो तमाम हिट फिल्में दे चुके थे. खामोशी, आनंद, बावर्ची जैसी कामयाब फिल्मों के डायलॉग्स भी गुलजार साहब की कलम से ही निकले थे. उनके पास फिल्मों से जुड़े तमाम पहलुओं का तजुर्बा हो चुका था. इसी दशक में उन्होंने फिल्म निर्देशन भी शुरू किया था. Read More : क्यों पंडित रविशंकर ने एक ही गायिका से गवा दिए थे फिल्म के सभी गाने? about क्यों पंडित रविशंकर ने एक ही गायिका से गवा दिए थे फिल्म के सभी गाने?

ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री,

ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, संगीतज्ञ एवं हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार थे। उनका सम्बन्ध ग्वालियर घराने से था। Read More : ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, about ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री,

बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली

बड़े गुलाम अली खान

कहते हैं इनकार करने की नीयत से बड़े गुलाम अली खान ने के. आसिफ से मेहनताने के तौर पर एक गाने के 25,000 रुपए मांगे थे, ये वो दौर था जब लता और रफी जैसे मशहूर गायकों को एक गाने का 500 से कम मिलता था Read More : बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली about बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली

उस्ताद बड़े गुलाम अली खान वाला पटियाला घराना

उस्ताद बड़े गुलाम अली खान

पटियाला घराना ख्याल गायकी के बड़े घरानों में गिना जाता है. इस घराने के प्रतिनिधि गायकों में अली बख्श और फतेह अली खान की गिनती होती है.

हालांकि इस घराने की लोकप्रियता बड़े गुलाम अली खान के आने के बाद से बढ़ी. इस घराने में ठुमरियों की गायकी पर महारत हासिल है.

इस घराने की गायकी में भावपक्ष पर भी काफी जोर दिया जाता है. मंद्र, मध्य और तार यानी तीनों सप्तक में इस घराने के कलाकार अपनी द्रुत ताने प्रस्तुत करते हैं. Read More : उस्ताद बड़े गुलाम अली खान वाला पटियाला घराना about उस्ताद बड़े गुलाम अली खान वाला पटियाला घराना

केसरबाई केरकर: पसंदीदा शास्त्रीय गायिका की कहानी

केसरबाई केरकर: पसंदीदा शास्त्रीय गायिका की कहानी

26 साल गुरू शिष्य परंपरा में संगीत सीखने के बाद जब उस्ताद नहीं रहे तब केसरबाई केरकर ने अकेले मंचीय प्रस्तुतियां देना शुरू किया 

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में जयपुर अतरौली घराने का बड़ा नाम है. उस्ताद अल्लादिया खां को इस घराने की शुरुआत करने वालों में गिना जाता है. उस्ताद अल्लादियां खां भारतीय शास्त्रीय संगीत गायकी का बहुत बड़ा नाम थे. उनका रियाज बड़ा कठोर माना जाता था. कहते हैं कि वो भारतीय शास्त्रीय संगीत के सबसे दुर्लभ और कठिन रागों को गाया करते थे. Read More : केसरबाई केरकर: पसंदीदा शास्त्रीय गायिका की कहानी about केसरबाई केरकर: पसंदीदा शास्त्रीय गायिका की कहानी

तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय

तानसेन के गीत,  तानसेन संगीत

तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक महान ज्ञाता थे। उन्हे सम्राट अकबर के नवरत्नों में भी गिना जाता है Read More : तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय about तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय

पण्डित अजॉय चक्रबर्ती

पण्डित अजॉय चक्रबर्ती

पण्डित अजॉय चक्रबर्ती (जन्म: २५ दिसम्बर १९५२) एक प्रतिष्ठित भारतीय हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार, गीतकार, गायक और गुरु हैं। उन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतकारी के विशिष्ठ व्यक्तित्वों में गिना जाता है। पटियाला कसूर घराना उनकी विशेष दक्षता है, तथा वे मूलतः उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली साहब और उस्ताद बरकत अली खान की गायकी का प्रतिनिधित्व करता हैं। तथा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय परम्परा के अन्य घराने, जैसे इंदौर, दिल्ली, जयपुर, ग्वालियर, आगरा, किराना, रामपुर तथा दक्षिण भारतीय कर्नाटिक संगीत की शैलियों का भी इनकी गायिकी पर प्रभाव पड़ता है। Read More : पण्डित अजॉय चक्रबर्ती about पण्डित अजॉय चक्रबर्ती

उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां

उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां

 में हुआ बाद में उन्होंने अपने पिता अली बख्श खां, चाचा काले खां और बाबा शिंदे खां से संगीत के गुर सीखे। इनके पिता महाराजा कश्मीर के दरबारी गायक थे और वह घराना "कश्मीरी घराना" कहलाता था। जब ये लोग पटियाला जाकर रहने लगे तो यह घराना "पटियाला घराना" के नाम से जाना जाने लगा। अपने सधे हुए कंठ के कारण बड़े गुलाम अली खां ने बहुत प्रसिद्ध पाई। सन १९१९ के लाहौर संगीत सम्मेलन में बड़े गुलाम अली खां ने अपनी कला का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया। इसके कोलकाता और इलाहाबाद के संगीत सम्मेलनों ने उन्हें देशव्यापी ख्याति दिलाई। उन्होंने अपनी बेहद सुरीली और लोचदार आवाज तथा अभिनव शैली के बूते ठुमरी को एकदम न Read More : उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां about उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां

अमवा महुअवा के झूमे डरिया

Sharda Sinha

अमवा महुअवा के झूमे डरिया  - 2
तानी ताका न बलम , तानी ताका न बलमुआ ओरिया । 

अमवा मोजर गइले महुआ कुचाई गइले 
अमवा मोजर गइले महुआ कुचाई गइले 
रसवा से भरी गइले कुल डरिया हो जी रसवा से भरी गइले कुल डरिया
तानी ताका न बलम , तानी ताका न बलमुआ ओरिया । 

महुआ बिनन हम गइली महुआ बगिया 
महुआ बिनन हम गइली महुआ बगिया 
रहिया जे छेकले देवर पापिया  हो जी रहिया जे छेकले देवर पापिया
तानी ताका न बलम , तानी ताका न बलमुआ ओरिया ।  Read More : अमवा महुअवा के झूमे डरिया about अमवा महुअवा के झूमे डरिया

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