स्नान श्लोक

स्नान संबंधी आचार

स्नान संबंधी आचार

१. स्नान का महत्त्व

        ‘स्नान करने से जीव के देह के सर्व ओर आए कष्टदायक शक्ति के आवरण एवं देह के रज-तम का उच्चाटन होता है तथा देह रोम-रोम में चैतन्य ग्रहण करने योग्य बनती है । मुखशुद्धि एवं शौचक्रिया के कारण भी जीव के देह से बाहर न निकलनेवाले कष्टदायक घटकों का स्नान के माध्यम से विघटन होता है ।’

२. स्नान करने के लाभ

अ. ‘स्नान के कारण जीव की देह के रज-तम कणों की मात्रा न्यून होती है तथा जीव वायुमंडल में प्रक्षेपित सत्त्वतरंगें सहजता से ग्रहण कर सकता है । Read More : स्नान संबंधी आचार about स्नान संबंधी आचार

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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