गर्भवती महिलाओं के लिए क्या सलाह है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक फ़ाइज़र-बायोटेक और मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए सलाह दी है. इसमें फ़िलहाल गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन नहीं लेने की सलाह दी गई है. इसकी वजह आंकड़ों की कमी को बताया गया है और यह भी कहा गया है कि इन वैक्सीन के गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होने का कोई सबूत नहीं मिला है.

  • लेकिन वैसी गर्भवती महिलाएं क्या करें जिनका डॉ. मैथ्यू की तरह संक्रमण की चपेट में आने जितना एक्सपोज़र हो रहा है, विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह के मुताबिक़, "हेल्थकेयर प्रोवाइडर से बातचीत करके उन्हें वैक्सीन लगाई जा सकती है."
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गर्भावस्था के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के जोख़िम को लेकर भी आगाह किया है.
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडेंस में कहा गया है, "आम महिलाओं की तुलना में गर्भवती महिलाओं के वायरस से संक्रमित होने का जोख़िम ज़्यादा होता है. संक्रमण के चलते प्री-मैच्योर बच्चे के जन्म का ख़तरा भी बढ़ जाता है."
  • डॉ. मैथ्यू ने पहले अपने डॉक्टर से बात की और उसके बाद उन्होंने उन सहकर्मियों से बात की जो गर्भवती थीं. डॉ. मैथ्यू ने कहा, "मैंने जब वैक्सीन को लेकर अनजाने सैद्धांतिक डर और गर्भावस्था के दौरान संक्रमण के वास्तविक डर को लेकर सोचा तो मेरे लिए फ़ैसला करना आसान हो गया."
  • डॉ. मैथ्यू ने फ़ाइजर-बायोटेक की वैक्सीन की पहली खुराक जनवरी में ली और उन्हें वैक्सीन की दूसरी खुराक फरवरी में दी जाएगी. हालांकि वैक्सीन को लेकर कई महिलाएं इससे उलट फ़ैसले ले रही हैं.
  • अमेरिका के दक्षिण पश्चिम ओहायो की जोआना सुलिवन जून में बच्चे को जन्म देनी वाली हैं. उन्होंने बच्चे को जन्म देने तक वैक्सीन नहीं लेने की योजना बनाई है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • इस संबंध में अभी तक बहुत आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. जॉन्स हॉपकिन्स बेरमन इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोएथिक्स की फ़ैकल्टी में शामिल कार्लेग क्रूबाइनर ने बताया, "वैक्सीन का गर्भवती महिलाओं पर ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है. सुरक्षा के उपाय और वैक्सीन के बेहतर प्रभाव के भरोसे के बाद भी अभी यह नहीं हुआ है."
  • हालांकि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि वैक्सीन से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कोई जोख़िम है लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई अध्ययन नहीं किया गया है.
  • फ़ाइज़र ने अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) के निर्देशों का पालन करते हुए गर्भवती महिलाओं पर वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल नहीं किया है.
  • हालांकि कंपनी की ओर से कहा जा रहा है कि गर्भवती महिलाओं पर वैक्सीन के प्रभाव का आकलन इस साल शुरू होगा और यह आकलन तथाकथित डार्ट स्टडीज (डेवलपमेंटल और रिप्रोडक्टिव टॉक्सिटी) के पूरा होने के बाद किया जाएगा. डार्ट स्टडीज आमतौर पर जानवरों की जाती है.

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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