जानिये कोलेस्ट्रॉल की सच्चाई दोस्तोँ

जानिये कोलेस्ट्रॉल की सच्चाई दोस्तोँ

जानिये कोलेस्ट्रॉल की सच्चाई दोस्तोँ " कोलेस्ट्रॉल के नाम पर महा धोका" पोस्ट व्हाट्सएप्प पे वायरल हो रही है। वह हम लोगों ने NutriWorld.in और फेसबुक पे शेयर भी की थी। जिस पर कुछ लोगों ने इस बारे में और जानने की जिज्ञासा की तथा कुछ लोगों को वो पोस्ट झूठ व् भ्रम फैलाने वाली लगी। मै भी इस पोस्ट से न सहमत हो पा रहा था और न ही असहमत। क्योकि  मेडिकल साइंस में 40-50 सालों से कोलेस्ट्रॉल का बड़ा होना हृदय रोगों के प्रमुख कारको में से एक बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर यह बात भी समझ नही आ रही थी जब हम सभी के शरीर में लिवर द्वारा अनिवार्य रूप से कोलेस्ट्रॉल का निर्माण किया ही जा रहा है। तब वह हमारे लिए खतरनाक क्यों है। वहीँ मैंने यह भी देखा कि कई लोगों का कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य होने के बाबजूद उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। ऐसा पिछले दिनों हो शहर के नामचीन बाल रोग विशेषज्ञ डॉ के साथ हो चुका था। उनका कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य ही रहता था तथा उनकी दिन चर्या भी ठीक थी, वह सुबह को योग भी करते थे तथा बैडमिंटन भी खेल लेते थे। उनसे परचित होने के कारण ये सब मेरी जानकारी में था।
दोस्तों सैंयोग से जो पुस्तक मैं इस समय पढ़ रहा हूँ वह पुस्तक है, "if your doctor doesn't know about nutritional medicine may be killing you " अगर इसको हिंदी में अनुवाद करें तो यह होगा कि " यदि आपका डॉ पोषक तत्वों के बारे में नहीं जानता है तो वह आपको मार रहा है।" यह पुस्तक अमेरिका के MD डिग्री होल्डर डॉक्टर Ray D Strand द्वारा लिखी गई है। उनके बारे में पहले बता दूँ, डॉ 30 वर्षों से एलोपैथी से मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे थे। डॉ की पत्नी बीमार हो गई थी, उन्हें सही करने में उनकी सभी दबाईयाँ नाकामयाब हो गई थीं। और वो मरणासन्न हो चुकी थी।डॉ भी हताश हो चुके थे। उनकी पत्नी की सहेली ने उन्हें न्यूट्रिशनल सप्प्लिमेंट्स खाने की सलाह दी और इससे वे पूरी तरह सही हो गईं। इससे पूर्व डॉ को न्यूट्रिशनल सप्प्लिमेंट्स में कोई विश्वास नही था और वे उन्हें गैर जरूरी समझते थे। इस घटना के बाद उनका नज़रिया पोषक तत्वों को अलग से भोजन के साथ लेने के प्रति बिलकुल बदल गया और उन्हीने आगे का जीवन इन्हीं के प्रति समर्पित कर दिया। अब डॉ का मानना है कि अन्य दवाइयों से भी ज्यादा जरुरी पोषक तत्व है, अधिकतर डॉ पोषक तत्वों को दबाईओं के साथ  सहायक के रूप में चलाते हैं। लेकिन अब डॉ रे डी स्ट्रैंड का मानना है कि अन्य दबाईयों की कोई आवश्कता नहीं है केवल पोषक तत्वों के माध्यम से ही बीमारियां ठीक हो सकती है।क्योंकि हमारा शरीर इस प्रकार का बना है कि ये अपने आपको स्वयं ठीक करने में सक्षम है, बस इसको उचित मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
तो बात कोलेस्ट्रॉल की हो रही थी, हमारे शरीर में दो प्रकार का कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। एक HDL जिसे अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है, दूसरा है LDL जिसे बुरा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। धमनियों में रूकावट के लिए LDL कोलेस्ट्रॉल को जिम्मेदार माना जाता है। किन्तु अब शोध से पता चला है कि LDL कोलेस्ट्रॉल अपने आप में समस्या नही है वल्कि ये शरीर के लिए जरुरी है किंतु जब LDL कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीडाइस हो जाता है तब यह धमनियों में प्लान्क के रूप में जमा होकर रुकाबट को जन्म देता है, फलस्वरूप हार्ट स्ट्रोक हो जाता है। अतः स्पष्ट है कि समस्या LDL कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीडेशन है। अब प्रश्न उठता है कि ये ऑक्सीडेशन क्यों होता है? ऑक्सीडेशन होता है फ्री रेडिकल्स के कारण अब प्रश्न उठता है कि ये फ्री रेडिकल्स होते क्या हैं। ये ऑक्सीजन के वे परमाणु हैं जिनकी बाहरी कक्षा में एक इलेक्ट्रान की कमी हो गई है। ये शरीर के जिस अंग में जाते हैं उसे नुकसान पहुचाते हैं। जिस प्रकार लोहे में जंग लगने से लोहा कमजोर होने लगता है करीब करीब वही प्रकिया यह हमारे शरीर में करते हैं। शरीर के बूढ़े होने की प्रक्रिया में इन्हीं फ्री रेडिकल्स का हाथ होता है। अब प्रश्न यह उठता है कि इनको बनने से रोके कैसे? ये शरीर में ऊर्जा बनने की प्रक्रिया का स्वाभाविक सह उत्पाद है किन्तु प्रदुषण व् अन्य टॉक्सिक पदार्थो के शरीर में जाने के कारण इनका निर्माण और तेजी से होने लगता है। आवश्कता से अधिक व्यायाम व् तनाव के कारण भी शरीर में इनका निर्माण बढ़ जाता है। इनको निष्प्रभावी करने के लिए शरीर प्रति ऑक्सीकारक या एंटी ऑक्सीडेंट का निर्माण करते हैं। प्रति ऑक्सीकारकों (एंटी ऑक्सीडेंट)के निर्माण के लिए शरीर को अनेक प्रकार के खनिज तत्वों जैसे कॉपर, जस्ता, सेलेनियम इत्यादि की आवश्यकता होती है। इनके अतिरिक्त विटामिन, फल शब्जियों में पाये जाने वाले फाइटो न्यूट्रिएंट भी अच्छे एंटी ऑक्सीडेंट होतें हैं। अतः स्पस्ट है दोषी अकेला कोलेस्ट्रॉल नही है वल्कि फ्री रेडिकल्स हैं। कोलेस्ट्रॉल की रक्त में उचित मात्रा को लेकर कई बार मेडिकल साइंस अपने आपको संशोधित कर चुकी है। पहले ये 350 से अधिक होने पर खतरनाक माना जाता था फिर ये 250 अब यह 150 से अधिक होने पर खतरनाक मन जाता है। इसका अर्थ है कहीं न कहीं इस सिद्धांत के कोई दोष है।
साथियों आपको बता दूं न्यूट्री वर्ल्ड का *माइक्रो डाइट एक अच्छा एंटी ऑक्सीडेंट है। जिसके लगातार सेवन से आप विभिन्न बीमारियों से बचे रह सकते हैं।*

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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