, जॉब करते समय बच्चों का रखे ध्यान आइये जाने बच्चों की परवरिश कैसे करें

काम करने के साथ निभाए एक अच्छी मां का फर्ज 

कामकाजी महिलाओं को हमेशा ऑफिस और बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बिठाने में मुश्किल होती है। अगर वो बच्चों का ध्यान रखती है तो ऑफिस के काम छूटने लगते हैं और अगर ऑफिस के काम को तवज्जों दें तो बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाती हैं। लेकिन घबराइए नहीं इन मुश्किलों के बीच भी आप खुद को स्थिर कर बच्चों और ऑफिस की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा सकती हैं। आइए जानें कैसे।

कामकाजी महिलाओं को आफिस और बच्चों की जिम्मेदारी के बीच तालमेल बिठाने आना चाहिए। 

संतुलन बनाएं रखें 

यदि आप अपने काम से भी प्यार करती हैं और बच्चे से संबंधित अपनी नई जिम्मेदारी के साथ किसी भी तरह अपने काम का बैलेंस बनाना चाहती हैं तो इस बात पर इत्मीनान से गौर करें कि क्या वाकई आपका सपोर्ट सिस्टम इतना अच्छा है कि आप उस पर भरोसा कर सकती हैं?

प्राथमिकता तय करें

सबसे पहले तो ये जरूरी है कि आप इस बात पर स्पष्ट रहें कि आखिर आप अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर क्या रखती हैं? यदि आपकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर बच्चा है तो फिर इस बात पर विचार करें कि बच्चे की देखभाल के बारे में आप किन-किन चीजों पर ध्यान देंगी और किस सीमा तक उसके साथ समझौता कर सकती हैं

 

, जॉब सोच -समझ करें ऑफिस का चुनाव

इसके साथ ही शुरुआती सालों में आप ये कोशिश भी कर सकती हैं कि किसी ऐसी कंपनी में काम करें, जहां एक मां के तौर पर आपकी जिम्मेदारी के प्रति भी संवेदनशीलता बरती जाती हो। काम के घंटे अपेक्षाकृत कम और दफ्तर का समय थोड़ा लचीला हो। यदि इस तरह की सुविधा और स्वतंत्रता आपको मिलती है तो आप बहुत इत्मीनान से दोनों के बीच संतुलन बना सकती हैं, लेकिन यदि ऐसा नहीं हो पाता है तो आपको खुद पर भरोसा रखना होगा

 

मदद लेने में किसी से नही लें बुराई

अगर आप मिलजुल कर काम करेंगी तो निश्चित ही काम जल्दी खत्म होगा और आप भी रिलैक्स रहेंगी। घर के कामों में पति की या अन्य किसी की मदद लेने से ना हिचकें। सारा काम अकेले ही करने की कोशिश में आप जल्द ही थक जाएंगी और बच्चे को समय नहीं दे पाएंगी। 

 

प्लानिंग करें इस प्रकार 

कामकाजी महिलाओं को प्लानिंग के साथ काम करना आना चाहिए। अपने हर काम की योजना बनाएं जिससे आपका समय बर्बाद न हो और न ही आप पर दबाव बने।

 

ऑफिस में लगातार काम नही करना चाहिए 

ऑफिस में भी लगातार काम न करें। कुछ  देर अपने सहकर्मियों के साथ चॉय-कॉफी पिएं और बातें करें। इससे आपका तनाव कम होगा।

तकनीक में मदद लें

आजकल बाजार में कई ऐसी चीजें उपलब्ध हैं जो खास कर कामकाजी मां को ख्याल में रखकर बनायी गई है। ये चीजें आपके काम को कम करने में आपकी मदद कर सकती हैं। इनके प्रयोग से आपका समय भी बर्बाद नहीं होता।

 

वीकएंड में खुद खाली रखें

बच्चों को वीकएंड का बड़ी बेसब्री से इंतजार होता है क्योंकि इस समय वे आपके साथ हो सकते हैं। वीकएं पर खाली रहने के लिए हफ्ते में हर दिन छोटे-छोटे काम निपटा लें, जिससे आप छुट्टी के दिन बच्चा के साथ पूरा समय व्यतीत कर सकें।

 

बच्चों से दिनचर्या के बारे में भी बात करते है 

अभिभावकों की व्यस्तता व उपेक्षा के चलते बच्चों में पढ़ाई के प्रति अरुचि पैदा होती है। उनका शैक्षिक रिकार्ड खराब होने लगता है। ऐसे में बच्चे पर मानसिक दबाव बनाने से बेहतर है कि उसे अधिक से अधिक समय देने के साथ बातचीत का दायरा बढ़ाएं। उसके स्कूल, दोस्तों और दिनचर्या पर चर्चा करें।

 

घर जल्दी लौंटें

अगर आपके ऑफिस की जिम्मेदारी जल्दी खत्म हो जाए तो घर जल्दी आकर बच्चों के साथ समय बीताएं। हर रोज अपने घर आने का समय निर्धारित कर लें जिससे आप उस समय तक अपने सभी काम निबटा सकेंगी और बच्चों के साथ समय भी बिता पाएंगी।

जॉब के साथ-साथ ऐसे करें अपने जुड़वा बच्‍चों की देखभाल

 

अभिनेत्री और गायिका जेनिफर लोपेज को अपने जुड़वा बच्चों-मैक्स और एमी की परवरिश अकेले ही कर रहीं है। ऐसी कई महिलाएं है जो अपने जुड़वा बच्चों को अकेले पाल रहीं है, उनकी परवरिश के लिए कुछ तरीके जो मददगार साबित हो सकते है।

धैर्य रखें इस प्रकार 

ध्यान रहें कि बच्चा एक ही क्यों ना हो तब भी उसकी परवरिश के लिए बहुत धैर्य रखना पड़ता है। ऐसे में अगर आपके जुड़वा बच्चे है तो आपको ज्यादा धैर्य का रखने की जरूरत पड़ेगी। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो बहुत जल्दी आपको चिड़चिड़हट का अनुभव होने लगेगा। जो आपकी परेशानी को बांटने के अलावा कुछ नहीं करेगा। अपने मां-बाप से बात करें, उनसे टिप्स लें। आपको बहुत आसानी होगी।  

मदद लें बच्चों को पालने में 

बच्चों को पालना अपने में ही आसान नहीं होता है। फिर चाहे एक ही बच्चा क्यूं ना हो। ऐसे में अगर आपका साथी भी नहीं है तो मुश्किलें थोड़ी बढ़ सकती है। पर आप परेशान ना हो। दोनो बच्चों की परवरिश के लिए आप किसी अन्य परिवारजन या दोस्त की मदद ले सकती है।  हो सकता है वो रातभर आपके पास ना रूक सकते हो पर दिन में तो आपके लिए बाहर से सामान लाने और खाना बनाने जैसे कामों में मदद कर सकते है। अगर आपके लिए संभव हो तो आप मेड रख लें। वो भी आपके लिए सुविधाजनक रहेगी। 

क्लब में शामिल हो तब 

जुड़वा बच्चों की परवरिश के लिए बाजार में कई तरह की किताबें मौजूद है, आप बच्चों के जन्म से पहले ही उनको जरूर पढ़े। ये आपको बहुत काम आएगी। साथ ही पता करे अगर आपके आसपास जुड़वा बच्चों के लिए कोई क्लब हो तो उसे ज्वाइन कर लें। ये आपकी मेहनत को भी बचाएगा साथ ही बच्चों के लिए भी बेहतर रहेगा।

 बच्चो को रोने दे 

बच्चें है परेशान होंगे, रोएंगे। जरूरी नहीं है कि हमेशा कोई दिक्कत ही हो। कई बार बच्चे बिना किसी कारण के भी रोते है। ऐसे में आप परेशान ना हों। सुनने में अजीब लगता है पर ये सही तरीका है। बच्चों के जन्म से लेकर पहले साल तक ये बहुत मुश्किल सा होता है कि दोनो को समय से स्तनपान करा सके या दोनो का एक समय पर कर सकें। लेकिन अगर ऐसे  में बच्चे रोते है तो परेशान ना हो। किसी भी तरह का गिल्ट ना रखें।

सर्दियों में अपनाएं ये टिप्स, शिशु रहेगा स्वस्थ

सर्दी के ठंड का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ता है। ऐसे में बच्चों कूी सुरक्षा के टिप्स जानना आपके लिए जरूरी है। इन टिप्स के बारे में इस लेख में पढ़ें।

सर्दी में रखे बच्चे का ध्यान 

सर्दियां शुरू होते ही बच्चों में सर्दी-खांसी की समस्या होना आम है। लेकिन पिछले कई सालों में सर्दियों में कई नई-नई बीमारियों ने भी पैर पसारने शुरू कर दिए जिस कारण बच्चों की अतिरिक्त केयर करना जरूरी है। क्योंकि बच्चे अपनी समस्या सही तरीके से बता नहीं पाते हैं और उनके उपचार के दौरान उनसे परहेज कराना भी बड़ा मुश्किल काम होता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े टिप्स की ये जानकारी आपके लिए ठंड के मौसम में काफी फायदेमंद रहेंगी।

 सर्दियों में रहें सतर्क 

ठंड में बीमारियां  कब अपने पैर पसारने शुरू कर देती हैं मालुम ही नहीं पड़ता। ऐसे में सतर्कता ही इन बीमारियों से बचने का बेहतर उपाय है। ठंड से बचाने के लिए बच्चों को अच्छे से कवर करके रखें और उनके खान-पान में गर्म और इम्युनिटी बढ़ाने वाली डाइट को महत्व दें। इसके अलावा भी कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं जैसे- हाइजीन का खास ध्यान रखा जाए, दिन में कई बार बच्चों को हाथ धुलने की आदत डलवाएं, अधिक से अधिक पेय और गर्म पेय का सेवन कराएं।

बीमारियों से दूर रखें

इसके अलावा इन्फ्लूएंजा और स्वाइन फ्लू की वैक्सीन भी बच्चों को जरूर दें जिससे वह इस मौसम में बीमारियों से दूर रहें। फ्लू की वैक्सीन ठंड शुरू होने के दौरान ही लगवा दें

दवा का ध्यान रखें

बच्चों की शरीर की जरूरतें, बड़ों की तुलना में अलग होती हैं। ऐसे में उनकी समस्या का खुद उपचार करने के बजाय डॉक्टर के इलाज को तरजीह दें। सर्दी-खांसी के लिए अपनी समझदारी से सिरप, दवा या नेजल ड्रॉप दे सकती हैं। लेकिन सर्दी-खांसी बढ़ने लगे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

खान-पान का ध्यान रखें

ठंड की खासियत है कि इसमें हर तरह के खाद्य पदार्थ औऱ सब्जियां मिलती हैं। इस मौसम का ये फायदा उठाने से चूकिए मत और अपने बच्चे को खूब सारी हरी-हरी सब्जियां खिलाइए।

 

 

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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