मनोविज्ञान

आराम की नींद पाने के लिये बेड़रूम में लगाएं ये पौधे

आराम की नींद पाने के लिये बेड़रूम में लगाएं ये पौधे

कई लोंगो को रात में अच्‍छी नींद नहीं आती, जिसके लिये वे दवाइयों का सेवन करना शुरु कर देते हैं। आज हम आपको ऐसे पांच पौधों के नाम बताएंगे, जिसे आप आराम से अपने बेड़रूम में लगा सकते हैं।

इन पौधों को लगाने से आपको नींद आएगी और शांति का एहसास होगा। आइये जानते हैं इनके बारे में...

एलोवेरा
कहते हैं कि एलोवेरा रात को ऑक्‍सीजन छोड़ता है जिससे नींद ना आने की बीमारी में लाभ मिलता है और नींद भी अच्‍छी क्‍वालिटी की आती है।  Read More : आराम की नींद पाने के लिये बेड़रूम में लगाएं ये पौधे about आराम की नींद पाने के लिये बेड़रूम में लगाएं ये पौधे

सेल्‍फी का एंगल खोलता है पर्सनालिटी के राज

सेल्‍फी का एंगल खोलता है पर्सनालिटी के राज

क्‍या सेल्‍फी से किसी की पर्सनालिटी का पता लगाया जा सकता है। एक ताजा रिसर्च की मानें तो जरूर पता लगाया जा सकता है। सिंगापुर की नैनयांग टेक्‍नीकल यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में यह पता चला है कि सेल्‍फी से व्‍यक्ति की शख्सियत का पता लगाया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का दावा है कि सेल्‍फी में दिखने वाले शख्‍स का चेहरा, सेल्‍फी लेने वाला स्‍थान और फोटो के एंगल से किसी उसकी पर्सनालिटी तथा कई अन्‍य जानकारियों के बारे में पता किया जा सकता है। Read More : सेल्‍फी का एंगल खोलता है पर्सनालिटी के राज about सेल्‍फी का एंगल खोलता है पर्सनालिटी के राज

फ़ेसबुक छोड़ो, सुख से जियो

आप अपनी लाइफ़ में खुश रहना चाहते हैं, तो कुछ दिनों के लिए फ़ेसबुक को हाथ मत लगाइए.

ऐसा डेनमार्क के कोपनहेगन विश्वविद्यालय में की गई ताज़ा रिसर्च के आधार पर कहा जा रहा है.

 

मॉर्टन ट्रॉमहोल्ट ने मास्टर की अपनी थीसिस में लिखा है, "ज़्यादातर लोग रोज़ाना फ़ेसबुक का इस्तेमाल करते हैं, पर उन्हें इसके नतीजों की जानकारी नहीं है. इस रिसर्च में यह पाया गया है कि फ़ेसबुक के इस्तेमाल से आपकी खुशी कम हो जाती है."

 

ट्रॉमहोल्ट ने साल 2015 के अंत में 1,095 लोगों पर अपना अध्ययन किया. इसमें आधे लोगों से कहा गया कि वे एक हफ़्ते तक फ़ेसबुक से दूर रहें.

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बॉस की हां में हां मिलाना कितना फ़ायदेमंद

बॉस की हां में हां मिलाना कितना फ़ायदेमंद

हम सब किसी भी तरह के वाद-विवाद से दूर रहना चाहते हैं. जब हम किसी से असहमत होते हैं तब भी हम दोस्ती बनाए रखना चाहते हैं. हम अपने शब्दों और बॉडी लैंग्वेज से ऐसे संकेत देते हैं कि हम मिलकर रहना चाहते हैं.

लॉबोरो यूनिवर्सिटी में कन्वर्जेशन एनालिसिस की प्रोफ़ेसर एलिजाबेथ स्टॉकी कहती हैं, "हम दूसरों को मौके भी देते हैं. अपनी बातचीत को नियंत्रित रखते हैं और लोगों को अपनी बात मनवाने की कोशिश करते हैं."

ऑफ़िस में तो हम कतई नहीं चाहते कि कोई विवाद हो या किसी से मनमुटाव हो. जिनकी बगल में रोजाना 8 घंटे बैठना हो उनसे भला कौन झगड़ना चाहता है? Read More : बॉस की हां में हां मिलाना कितना फ़ायदेमंद about बॉस की हां में हां मिलाना कितना फ़ायदेमंद

झूठ कैसे दिमाग में पनपता है

झूठ, एक असत्य बयान के रूप में दिया गया एक प्रकार का धोखा है, जो विशेष रूप से किसी को धोखा देने की मंशा से बोला जाता है और प्रायः जिसका उद्देश्य होता है किसी राज़ या प्रतिष्ठा को बरकरार रखना, किसी की भावनाओं की रक्षा करना या सजा या किसी के द्वारा किए गए कार्य की प्रतिक्रिया से बचना. झूठ बोलने का तात्पर्य कुछ ऐसा कहने से होता है जो व्यक्ति जानता है कि गलत है या जिसकी सत्यता पर व्यक्ति ईमानदारी से विश्वास नहीं करता और यह इस इरादे से कहा जाता है कि व्यक्ति उसे सत्य मानेगा. Read More : झूठ कैसे दिमाग में पनपता है about झूठ कैसे दिमाग में पनपता है

क्या इंसान सोचने से ज़्यादा हंसता है?

क्या इंसान सोचने से ज़्यादा हंसता है?

हंसी इंसान का ऐसा भाव है, जो पूरी दुनिया में ख़ुशी के जज़्बात बयां करने के लिए जानी जाती है. हर इंसान हंस सकता है. हर हंसी के अलग मायने होते हैं. कोई यूं ही हंस पड़ता है. किसी को गुदगुदी से हंसी आ जाती है. कोई मज़ाक़ कर के ख़ुद ही ठहाका लगा लेता है. तो, कोई दूसरे का जोक सुनकर ज़ोर से हंस पड़ता है. कभी किसी की उपलब्धि पर हंसी आती है. तो, कई बार किसी को मुश्किल में पड़ा देख लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते.

कुल मिलाकर ये कहें कि हंसी का इंसान के समाज और संवाद से गहरा ताल्लुक़ है, तो ग़लत नहीं होगा.

इंसान के सामाजिक प्राणी होने की मज़बूत धुरी है हंसी.

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तो, ज़िंदगी का बड़ा फ़ैसला कब लिया जाना चाहिए?

ज़िंदगी का कोई बड़ा फ़ैसला लेना हो, तो कब लिया जाए?

शादी, तलाक़, नौकरी बदलना या फिर कोई भी और बड़ा फ़ैसला लेने का कोई सही वक़्त होता है क्या? हम जब कोई बड़ा फ़ैसला लेते हैं, तो नफ़ा-नुक़सान तोलते हैं. आंकड़ों की मदद से ख़ुद को उसके लिए तैयार करते हैं. कई बार एक झटके में भी फ़ैसले ले डालते हैं. बहुत से लोग साल के आख़िरी महीने तक फ़ैसला टालते हैं. वहीं, कुछ ऐसे भी होते हैं जो नए साल का इंतज़ार करते हैं, फ़ैसला लेने के लिए.

तो, ज़िंदगी का बड़ा फ़ैसला कब लिया जाना चाहिए?

इस सवाल का जवाब हमारे मूड पर निर्भर करता है. Read More : तो, ज़िंदगी का बड़ा फ़ैसला कब लिया जाना चाहिए? about तो, ज़िंदगी का बड़ा फ़ैसला कब लिया जाना चाहिए?

महिला को इंप्रेस कैसे करें

महिला को इंप्रेस कैसे करें

किसी लड़की को इंप्रेस करना पुरुष के लिए काफी जटिल काम होता है। चूंकि महिला और पुरुष आम तौर पर एक दूसरे के विपरीत स्वभाव वाले होते हैं ऐसे में किसी महिला के दिल में क्या बात है उसे जानना पुरुष के लिए आसान नहीं होता। महिला को इंप्रेस करने के चक्कर में पुरुष कभी-कभी 'गलत' कदम उठा लेते हैं और अपनी मित्रता की संभावना समाप्त कर लेते हैं लेकिन लड़की को इंप्रेस करने के कुछ टिप्स हैं जिन्हें अपनाकर पुरुष अपने लक्ष्य में सफल हो सकते हैं।   
लड़कियों को इंप्रेस करने के कुछ टिप्स  Read More : महिला को इंप्रेस कैसे करें about महिला को इंप्रेस कैसे करें

चीन का वो स्कूल जहां डेटिंग सिखाई जाती है

चीन का वो स्कूल जहां डेटिंग सिखाई जाती है

आप को डेटिंग पर जाना है?

क्या आप को डेटिंग के तौर-तरीक़े पता हैं? क्या आप को मालूम है कि प्यार-मोहब्बत की मुलाक़ातों-बातों में आप को हमेशा बेहद संवेदनशील और अपने साथी के जज़्बातों का ख़याल रखने वाला होना है? क्या आप को मालूम है कि कामयाब डेटिंग के लिए आप को अच्छे से डांस करना आना चाहिए?

अगर आपका जवाब ना है, तो इन मुश्किलों का हल है हमारे पास. चलिए आज आप को ले चलते हैं चीन के डेटिंग स्कूल में. जहां लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है, कामयाब डेटिंग की.

चीन, आबादी के लिहाज़ से दुनिया का सबसे बड़ा देश है. यहां लड़कों की तादाद लड़कियों के मुक़ाबले ज़्यादा है. Read More : चीन का वो स्कूल जहां डेटिंग सिखाई जाती है about चीन का वो स्कूल जहां डेटिंग सिखाई जाती है

क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर?

क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर?

एडीएचडी, यानि एक तरह का न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर. आम तौर पर ये लड़कियों के मुक़ाबले लड़कों में ज़्यादा पाया जाता है.

लेकिन बहुत सी लड़कियों में ये लड़कों से भी ज़्यादा ख़तरनाक स्तर पर हो सकता है. मुख्य तौर पर ये डिसऑर्डर तीन तरह का होता है.

इसमें मरीज़ का दिमाग़ चीज़ों पर फ़ोकस नहीं कर पाता. छोटी-छोटी चीज़ों को बहुत जल्दी भूलता रहता है. इसका दूसरा रूप हम तब देखते हैं, जब मरीज़ बहुत ज़्यादा एक्टिव और बातूनी हो जाता है. वो कहीं भी घड़ी भर को टिक कर नहीं बैठ पाता. Read More : क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर? about क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर?

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जवाब विशेषज्ञ से लें

Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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