ब्रह्मांड की चौड़ाई - 93 अरब प्रकाशवर्ष

ब्रह्मांड की चौड़ाई - 93 अरब प्रकाशवर्ष

ताजा अनुमान कहते हैं कि ब्रह्मांड 93 अरब प्रकाश वर्ष चौड़ा है. प्रकाश वर्ष वो पैमाना है जिससे हम लंबी दूरियां नापते हैं. प्रकाश की रफ्तार बहुत तेज होती है. वो एक सेकेंड में करीब दो लाख किलोमीटर की दूरी तय कर लेता है. 
 
तो एक साल में प्रकाश जितनी दूरी तय करता है उसे पैमाना बनाकर दूरी को प्रकाश वर्ष में नापते हैं. इतनी लंबी दूरी को किलोमीटर या मील में बताना बेहद मुश्किल है. इसीलिए प्रकाश वर्ष को पैमाना बनाया गया है.
 
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ब्रह्मांड का सही नाप जान सकेंगे

ब्रह्मांड का सही नाप जान सकेंगे

आकाश अनंत है. इसका कोई ओर-छोर नहीं है. ये कितना बड़ा है इसका कोई ठोस अंदाज़ा अब से पहले तक नहीं था.
मगर बरसों की मेहनत के बाद अब कुछ वैज्ञानिक ये दावा करने लगे हैं कि उन्होंने ब्रह्मांड को नाप लिया है.
ताज़ा अनुमान कहते हैं कि ब्रह्मांड 93 अरब प्रकाश वर्ष चौड़ा है. प्रकाश वर्ष वो पैमाना है जिससे हम लंबी दूरियां नापते हैं.
प्रकाश की रफ़्तार बहुत तेज़ होती है. वो एक सेकेंड में क़रीब दो लाख किलोमीटर की दूरी तय कर लेता है.
तो एक साल में प्रकाश जितनी दूरी तय करता है उसे पैमाना बनाकर दूरी को प्रकाश वर्ष में नापते हैं.
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एक अरब साल पुरानी गुरुत्‍व तरंगों की कहानी

गुरुत्व तरंगें

करीब एक अरब वर्ष पहले अंतरिक्ष में दो ब्लैक होल आपस में टकराकर एक-दूसरे में विलीन हो गए। इस प्रक्रिया में उत्पन्न् कंपन से गुरुत्व तरंगें निकलीं जो अंतरिक्ष में भ्रमण करते हुए पृथ्वी पर पहुंचीं और गत सितंबर में वैज्ञानिकों ने पहली बार इन तरंगों की 'चहक" सुनी। वैज्ञानिक इन तरंगों को 'ग्रेविटेशनल वेव्स" भी कहते हैं। इन तरंगों के अस्तित्व के बारे में पिछली एक सदी से अटकलें लगाई जा रही थीं। इनके अस्तित्व के बारे में सर्वप्रथम सैद्धांतिक परिकल्पना अल्बर्ट आइंस्टीन ने की थी। गुरुत्व तरंगों की खोज के लिए स्थापित वेधशाला लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी (लिगो) के कार्यकारी निदेशक डेविड Read More : एक अरब साल पुरानी गुरुत्‍व तरंगों की कहानी about एक अरब साल पुरानी गुरुत्‍व तरंगों की कहानी

जहां औसत तापमान 460 डिग्री सेल्सियस है

जहां औसत तापमान 460 डिग्री सेल्सियस है

हम जब भी अंतरिक्ष में जाने की बात करते हैं, हमारे ज़ेहन में चांद पर जाने या फिर मंगल ग्रह पर जाने का ख़्याल सबसे पहले आता है.

ये दोनों धरती के सबसे क़रीब जो हैं. मगर, एक और ग्रह जो धरती के क़रीब है वो है शुक्र. वहां जाने की ज़्यादा बात नहीं होती है.

लेकिन अब अमरीका और रूस के अलावा यूरोपीय देशों की स्पेस एजेंसी भी शुक्र ग्रह पर मिशन भेजने की तैयारी कर रही है.

शुक्र ग्रह, हमारे सौर मंडल के सबसे भयानक माहौल वाले ग्रहों में से एक है. ये पूरी तरह से गंधक के एसिड के बादलों से ढका है. Read More : जहां औसत तापमान 460 डिग्री सेल्सियस है about जहां औसत तापमान 460 डिग्री सेल्सियस है

आराम की नींद पाने के लिये बेड़रूम में लगाएं ये पौधे

आराम की नींद पाने के लिये बेड़रूम में लगाएं ये पौधे

कई लोंगो को रात में अच्‍छी नींद नहीं आती, जिसके लिये वे दवाइयों का सेवन करना शुरु कर देते हैं। आज हम आपको ऐसे पांच पौधों के नाम बताएंगे, जिसे आप आराम से अपने बेड़रूम में लगा सकते हैं।

इन पौधों को लगाने से आपको नींद आएगी और शांति का एहसास होगा। आइये जानते हैं इनके बारे में...

एलोवेरा
कहते हैं कि एलोवेरा रात को ऑक्‍सीजन छोड़ता है जिससे नींद ना आने की बीमारी में लाभ मिलता है और नींद भी अच्‍छी क्‍वालिटी की आती है।  Read More : आराम की नींद पाने के लिये बेड़रूम में लगाएं ये पौधे about आराम की नींद पाने के लिये बेड़रूम में लगाएं ये पौधे

ब्रह्मांड के विचित्र सिद्धांत

ब्रह्मांड के विचित्र सिद्धांत

ब्रह्मांड, इन्फिनिटी और रहस्य की। छोटे सौर मंडल, ब्रह्मांड और अपने परिधीय, है बहुत ज्यादा सभी ज्ञान और समझ के भागों में, यह ऐसी एक सिरदर्द था। इसकी आंतरिक कार्रवाई और अन्य जीवन रूपों की उपस्थिति के साथ आमतौर पर परे, ब्रह्मांड के रहस्यों निकट से संबंधित हैं। सिद्धांत ही ब्रह्मांड के कई रहस्य पता करने के लिए, लेकिन भी मनुष्य वास्तविक दुनिया के सभी धारणा विकृत करने के लिए आसान नहीं है।

 कितने ग्रहों में सौर? कोई नहीं जानता Read More : ब्रह्मांड के विचित्र सिद्धांत about ब्रह्मांड के विचित्र सिद्धांत

चमकेगा पृथ्वी पर दूसरा सूरज

कब चमकेगा पृथ्वी पर दूसरा सूरज

कहानी के मुताबिक एक असाधारण ग्रहण की वजह से जब उस ग्रह पर उन छहों सूर्यों की रोशनी आनी बंद हो गई तो उसके निवासियों ने रोशनी को बचाए रखने की जिद में जमीन पर मौजूद हर चीज को जला डाला। पर क्या सचमुच किसी नक्षत्र मंडल में एक से ज्यादा सूर्य हो सकते हैं?

इसाक असिमोव ने 1941 में 'नाइटफॉल' नाम की एक विज्ञान कथा लिखी थी, जिसने उस जमाने में दुनिया भर के खगोलविदों को सोचने पर मजबूर कर दिया था। उस गल्प में एक ऐसी दुनिया की कल्पना की गई थी, जिसमें छह-छह सूर्य मौजूद हैं।  Read More : चमकेगा पृथ्वी पर दूसरा सूरज about चमकेगा पृथ्वी पर दूसरा सूरज

नासा ने अंतरिक्ष में उगाई बंद गोभी!

नासा ने अंतरिक्ष में उगाई बंद गोभी!

अंतरिक्षयात्रियों ने लगभग एक महीने तक कोशिश करने के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में चीनी बंदगोभी उगाई. नासा के अनुसार अंतरिक्षयात्री पेगी विटसन ने जापान की ‘तोक्यो बेकाना’ नामक चीनी गोभी उगाई.

अंतरिक्ष केंद्र के अंतरिक्षयात्रियों को इनमें से कुछ गोभी खाने के लिए मिलेंगी और बाकी नासा के केनेडी अंतरिक्ष केंद्र में वैज्ञानिक अध्ययन के लिए सुरक्षित कर लिया जाएगा.

यह अंतरिक्ष केंद्र में उगाई जाने वाली पांचवी फसल होगी अैर पहली चीनी गोभी. चीनी गोभी का चुनाव अनेक पत्तेदार सब्जियों के आकलन के बाद किया गया. Read More : नासा ने अंतरिक्ष में उगाई बंद गोभी! about नासा ने अंतरिक्ष में उगाई बंद गोभी!

हिमालय में आ सकता है एम 8 तीव्रता का भूकंप

खतरे में हिमालय- आ सकता है एम 8 तीव्रता का भूकंप

हिमालय रेंज में जनवरी 2016 में एम 8 तीव्रता का भूकंप आने की संभावना है। रूस के वैज्ञानिक वी. कोस्वोकोव ने यह भविष्यवाणी की है। हालांकी इस भविष्यवाणी में भूकंप का केन्द्र के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है। रूसी वैज्ञानिक की इस चेतावनी के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण हिमालय के साथ लगे राज्यों हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा व जम्मू कश्मीर की सरकारों को कई माह पहले ही पत्र लिखकर आगाह कर चुका है। Read More : हिमालय में आ सकता है एम 8 तीव्रता का भूकंप about हिमालय में आ सकता है एम 8 तीव्रता का भूकंप

पृथ्वी के थे दो चांद

पृथ्वी के थे दो चांद

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के आधार पर परिकल्पना की है कि संभवतः चार अरब साल पहले पृथ्वी का एक दूसरा चांद था जो धीमी गति से बड़े चांद के साथ टकराया और नष्ट हो गया। इस परिकल्पना का विस्तृत ब्यौरा नेचर पत्रिका में छपा है। शोधकर्ताओं ने संकेत दिया है कि दूसरा छोटा चांद नष्ट होने से पहले लाखों साल तक अस्तित्व में रहा। वैज्ञानिकों का मानना है कि धीमी गति से छोटे चांद के बड़े चांद से टकराने के कारण ही संभवतः चांद की पृथ्वी से नजर आने वाली सतह पर कई खाइयां है (जिन्हें साहित्यकार चांद में दाग बताते हैं), लेकिन चांद का जो भाग पृथ्वी से नजर नहीं आता है, उस ओर इस टकराव की वजह से लगभग 3000 मीटर ऊंचे पहाड़ पैद Read More : पृथ्वी के थे दो चांद about पृथ्वी के थे दो चांद

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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