पंचकोश सिद्धांत
Submitted by vasna on 25 November 2019 - 10:49pmयोग की धारणा के अनुसार मानव का अस्तित्व पाँच भागों में बंटा है जिन्हें पंचकोश कहते हैं। ये कोश एक साथ विद्यमान अस्तित्व के विभिन्न तल समान होते हैं। विभिन्न कोशों में चेतन, अवचेतन तथा अचेतन मन की अनुभूति होती है। प्रत्येक कोश का एक दूसरे से घनिष्ठ संबंध होता है। वे एक दूसरे को प्रभावित करती और होती हैं।हमारे शरीर में 5(पांच) कोष होते हैं जिसे विज्ञान ने भी मान लिया है :-
1-अन्नमय कोष(physical Body)
2-प्राणमय कोष(Etherik Body )
3-मनोमय कोष (Astral Body )
4-विज्ञानमय कोष(Cosmic Body)
5-आनन्दमय कोष(Casual Body)
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