करीपत्ता की खेती कैसे करे

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कढ़ी पत्ते का पेड़ ; अन्य नाम: बर्गेरा कोएनिजी, चल्कास कोएनिजी उष्णकटिबंधीय तथा उप-उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में पाया जाने वाला रुतासी परिवार का एक पेड़ है, जो मूलतः भारत का देशज है। अकसर रसेदार व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले इसके पत्तों को "कढ़ी पत्ता" कहते हैं। कुछ लोग इसे "मीठी नीम की पत्तियां" भी कहते हैं। इसके तमिल नाम का अर्थ है, 'वो पत्तियां जिनका इस्तेमाल रसेदार व्यंजनों में होता है'। कन्नड़ भाषा में इसका शब्दार्थ निकलता है - "काला नीम", क्योंकि इसकी पत्तियां देखने में कड़वे नीम की पत्तियों से मिलती-जुलती हैं। लेकिन इस कढ़ी पत्ते के पेड़ का नीम के पेड़ से कोई संबंध नहीं है। असल में कढ़ी पत्ता, तेज पत्ता या तुलसी के पत्तों, जो भूमध्यसागर में मिलनेवाली ख़ुशबूदार पत्तियां हैं, से बहुत अलग है।

वानस्पतिक विवरण –
  • श्रेणी (Category) सगंधीय
  • समूह (Group) कृषि योग्य 
  • वनस्पति का प्रकार झाड़ी
  • मीठी नीम या करी पत्ता का वानस्पतिक नाम मुर्राया कोएनिगी (Murraya koenigii)
  • सामान्य नाम मीठी नीम
  • कुल रूटेऐसी
  • आर्डर सेपिन्डलेस
  • प्रजातियां : एम. कोयनिगी (Chalcas koenigii) 
  • मीठी नीम या करी पौधा का उद्भव स्थान – करी पत्ता वृक्ष मूल रूप से भारत और श्रीलंका में पाया जाता है। समान्यत: यह हिमालय के क्षेत्रआसामचटगाँव में पाया जाता है।

 

करी पत्ता की खेती या मीठी नीम की खेती कैसे करें ?  करी पत्ता का पेड़ कैसे लगाएँ ?

वितरण 

यह छोटा वृक्ष है जिसकी पत्तियों से तीखी सुरभित खुशबू आती है। यह भारत के प्रायद्दीपीय क्षेत्र के सदाबहार और पर्णपाती जंगलो में पाया जाता है। इसके पत्तों को अधिकतर रसेदार व्यंजनों में प्रयोग किया जाता है । इसलिए इसके पत्तों को करी पत्ता व पेड़ को करी पेड़ के नाम से भी जाना जाता है | कुछ स्थानों पर इसकी पत्तियों को मीठी नीम की पत्तियां भी कहा जाता है |
 
इस वृक्ष के प्रत्येक हिस्से से एक तीव्र विशिष्ट गंध आती है। कन्नड़ भाषा में इसे काला नीम भावार्थ से पुकारते हैं |
किसान भाइयों एक बात यहाँ पर स्पष्ट तौर खेती किसानी डॉट ओर्ग अपने पाठकों को बता देना चाहता है । कि इस पौधे का किसी भी तरह का सम्बन्ध नीम के पेड़ से नही है | मैदानी इलाको के लोग विशेष रूप से दक्षिण भारत के लोग इस पौधो की पत्तियों का उपयोग विभिन्न प्रकार की करी तैयार करने में मसालों के रूप करते है। इसकी सुगंधित पत्तियो के लिए खेती की जाती है। यह संपूर्ण भारत में लगभग 1500 मीटर की ऊचाँई तक पाया जाता है।
 
हमारे देश के बुन्देलखंड प्रान्त में यह पत्ता कढ़ी या करी नामक व्यंजन बनाने में भी उपयुक्त होता है। हालांकि कढ़ी पत्ते का सबसे अधिक उपयोग रसेदार व्यंजनों में होता है । पर इनके अलावा भी अन्य कई व्यंजनों में मसाले के साथ इसका इस्तेमाल किया जाता है | करी पत्ता की पत्तियों को पीस कर चटनी भी तैयार की जाती है। जिसे लोग बहुत स्वाद से खाते हैं |
 

यह एक फैलने वाली झाड़ी है।तना गहरे हरे से लेकर भूरे रंग का होता है जिसमें असंख्य बिन्दु बने होते है। मुख्य तने की परिधि लगभग 16 से.मी. होती है। मीठी नीम की पत्तियाँ 30 से.मी. लंबी होती है | साथ ही प्रत्येक पर 24 पत्रक होते है। मीठी नीम के पत्रक भाले के आकार के लगभग 4.9 से.मी. लंबे, व लगभग 1.8 से.मी. के चौड़े होते हैं | इसके डंठल की लम्बाई लगभग 0.5 से.मी. होती है |

मीठी नीम (करी पत्ता ) की खेती कैसे करें ? 
 
मीठी नीम में पुष्पं 15 अप्रैल से प्रारम्भ होकर 15 मई तक समाप्त होते हैं | इसके फूल उभयलिंगी, सफेद कीप के आकार और मीठी सुगंध वाले होते है। एक पूर्ण खिले हुये फूल का औसत व्यास लगभग 1.12 से.मी. होता है।15 मई के बाद मीठी नीम में फलन प्रारम्भ होती है | मीठी नीम के फल फल आयताकार लगभग 1.4 से 1.6 से.मी. लंबे, 1 से 1.2 से.मी. व्यास के होते हैं | इनका वजन लगभग 880 मिलीग्राम होता है | परिपक्व फलों की सतह बहुत चमकीली के साथ काले रंग की होती है | मीठी नीम में फलों की संख्या प्रति समूह 32 से 80 होती है साथ ही बीज 11 मिमी लंबे और 8 मिमी व्यास के होते है।मीठी नीम के प्रत्येक फल में एक बीज होता है जो 11 मिमी लंबा औप 8 मिमी व्यास का होता है।मीठी नीम का पौधा लगभग 2.5 मीटर ऊँचाई बढ़ता है |

जलवायु  व तापमान :
मीठी नीम (करी पत्ता ) का पौधा एक उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु का पौधा है इसकी बढवार उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में सबसे अच्छी होती है | पूर्ण सूर्य की रोशनी के साथ इसे गर्म तापमान की आवश्यकता होती है। मीठी नीम करी पत्ता पौधे को समुद्र तल से 1000 मी. की ऊँचाई पर भी उगाया जा सकता है।
भूमि का चयन :
करी पौधा की खेती के लिए उपजाऊ छिद्रयुक्त व उचित जल प्रबन्धन वाली दोमट भूमि उपयुक्त होती है | मीठी नीम के लिए चयनित मृदा में जल ग्रहण करने की क्षमता होनी चाहिए | भूमि का पीएच 6 से 7 के बीच होना चाहिए |

भूमि की तैयारी :
मीठी नीम की खेती के लिए खेत को 2 से 3 जुताइयाँ कर हर जुताई के बाद पाटा चलाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए | खेत को ढेले रहित व भुरभुरा बना लेना चाहिए |

फसल पद्धति विवरण  :
मीठी नीम के पौधे रोपाई के लिए बीजों के द्वारा आसानी से उगाया जा सकता है। इस प्रकार उत्पादन बहुतायत से होता है। बीजों को गूदे से अच्छी प्रकार निकल कर साफ़ करें रोपाई के समय किसान भाई ध्यान दें की मीठी नीम के बीजों को उनके आकार की गहराई तक लगाना चाहिए, ताकि उनमें अंकुरण शीघ्र हो |

खाद  व उर्वरक :
खेत की तैयारी के समय मिटटी में 250-300 कुंतल सड़ी गोबर की खाद सामान रूप से खेत में मिला देना चाहिए | इसे वैसे तो अधिक उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती है। किन्तु पौधे के विकास के दौरान सप्ताहिक रूप में उर्वरक देना अच्छा रहता है |

सिंचाई व जल निकास व खरपतवार प्रबंधन –
मीठी नीम का पौधा अधिक जलमांग वाला पौधा है | किसान भाई गर्मियों के दिनों में फसल पर नियमित रूप से सिंचाई अवश्य करें | वहीँ सर्दियों में किसान भाई हल्की सिंचाई करें पर ध्यान रहे इस समय उर्वरक बिलकुल नही दें | सिंचाई के बाद भूमि नम हो जाती है | अब निराई गुड़ाई करना चाहिए | निराई गुड़ाई कर खरपतवार को निराई कर फसल से निकाल देना चाहिए | साल में 1-2 बार निराई की आवश्यकता होती है। निराई करते समय पौधों पर मिटटी चढ़ा दें ताकि जड़े खुली न रहें |

तुडाई, फसल कटाई का समय :
मीठी नीम के पौधे में जब पर्याप्त वानस्पतिक विकास हो जाये | मीठी नीम के पौधे की शाखाओं में पत्तियाँ पूर्ण विकसित हो जाएँ | मीठी की नीम की तुड़ाई किसान भाई कर सकते हैं | वैसे तो आवश्यकता पड़ने पर इसकी पत्तियों को किसी भी समय तोडा जा सकता है | परिपक्व व बड़ी पत्तियों की तुड़ाई तोड़ना हाथ से करनी चाहिए | अविकसित पत्तियों की तुड़ाई किसान न करें | ऐसी पत्तियों की तुड़ाई अगले चक्र में करें |

सुखाना :
मीठी नीम तोड़ी गयी सभी संपूर्ण पत्तियों को इकट्ठा करके छायादार जगह में सुखा लें | पातियों को पलटते रहें जिससे की पत्तियां सड़ने न पायें अन्यथा उनकी गुणवत्ता प्रतिकूल असर पड़ता है | बाजार में ऐसी पत्तियों का उचित दाम भी नही मिल पाता | साथ ऐसी पत्तियों से बनाएं चूर्ण में भी अन्य स्वस्थ पत्तियों से बनाये गये चूर्ण के बराबर खुशबू व गुणवत्ता नही होती है |

पैकिंग  :
मीठी नीम या करी पत्ता की पत्तियों की पैकेजिंग हेतु वायुरोधी थैले आदर्श व सर्वोत्तम माने जाते हैं | करी पत्ता की पत्तियों को पालीथीन या नायलाँन के थैलों में पैक किया जाता बाजार में भेजने के लिए तैयार तैयार किया जाता है |

भडांरण :
मीठी नीम की पत्तियों को शुष्क स्थान में भंडारित करना चाहिए। करी पत्ता की पत्तियों का भंडारण गोदाम भंडारण सर्वोत्तम होता है | कोल्ड स्टोरेज इसके लिए उपयुक्त नही होते |

परिवहन :
किसान भाई अपनी सुविधा के अनुसार उत्पाद को बैलगाड़ी या टैक्टर से बाजार तक पहुंचाता है | वैसे बड़े क्षेत्रफल के उत्पादकों के लिए एजेंसियां अथवा व्यापारी सीधे खेत से लोडर अथवा ट्रक व ट्रैक्टर के माध्यम से ट्रांसपोर्ट कर लेते हैं |  दूरी अधिक होने पर उत्पाद को ट्रक या लाँरियो के द्वारा बाजार तक पहुँचाया जाता हैं। परिवहन के दौरान चढ़ाते एवं उतारते समय मीठी नीम की पत्तियां अच्छी पैकेजिंग होने पर खराब नहीं होती |

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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