राग की तुलना में भाव सौंदर्य को अधिक महत्वपूर्ण ठुमरी होती है।

ठुमरी- ठुमरी गीत का वह प्रकार है जिसमें राग की शुद्धता की तुलना में भाव और सौंदर्य को अधिक महत्व दिया जाता है। इसकी प्रकृति चपल और द्रुत होती है। इसमें शब्द कम होते हैं और शब्दों का भाव विविध स्वर -समूहों द्वारा व्यक्त किया जाता है। ठुमरी श्रृंगार रस प्रधान होती है। इसमें मींड़ और कण का विशेष प्रयोग होता है।

ठुमरी का एक और प्रकार है जो शब्द और लय प्रधान है। इसके शब्द अनुप्रास युक्त होते हैं, जैसे छाई छटा, तरसे लरजे, जिया पिया बिना इत्यादि ।

इस ठुमरी में वियोग व्यथा की पराकाष्ठा का अनुमान कीजिये।

स्थाई:- पपीहा पी की बोली न बोल।

अंतरा:- सुन पावेगी कोई विरह की मारी देगी पंख मरोड़।।

ध्रुपद - ध्रुपद गम्भीर प्रकृति का गीत है। इसे गाने पर कण्ठ और फेफड़ों पर बल पड़ता है। इसलिये लोग इसे मर्दाना गीत कहते हैं। इसका प्रचलन मध्यकाल में अधिक था और आजकल जनरुचि में परिवर्तन होने होने के कारण इसका स्थान ख़्याल ने ले लिया है। अधिकांश ध्रुपद के चार भाग होते हैं, स्थाई ,अन्तरा, संचारी और आभोग। इसके अधिकांश शब्द ब्रजभाषा के होते हैं। इसमें वीर,शांति और श्रृंगार रस की प्रधानता होती है। यह चारताल, ब्रह्मताल,सूलताल, तीव्रा, मत्त आदि तालों में गाया जाता है जो पखावज के ताल हैं।

ध्रुपद में सर्वप्रथम नोम-तोम का सविस्तार आलाप किया जाता है आलाप के बाद ध्रुपद की बंदिश गाते हैं और फिर विभिन्न प्रकार की लयकरियाँ दिखाते हैं।

आजकल ध्रुपद अधिकतर चारताल में गाया जाता है। राग मालकोश में एक प्रसिद्ध ध्रुपद को देखिये—

स्थाई:- आये रघुवीर धीर लंकधीशअवध मान।

संग सखा, अंगद, सुग्रीव और हनुमान।

अन्तरा:- रहस रहस गावत यवती जग बन्धन विधान।

देव कुसुम बरसत घन जाके रहे नभ विमान।।

ख्याल- यह फ़ारसी भाषा का शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ है “कल्पना” । गीत के इस प्रकार में कल्पना का विशेष महत्व होने के कारण ही शायद इसे ख्याल की संज्ञा दी गयी है।

ख्याल गीत का वह प्रकार है जिसमें राग के नियमों की रक्षा करते हुये आलाप, तान, बोलतान, खटका, मुर्की, सरगम आदि विभिन्न अलंकारों द्वारा तबले के साथ गायक अपनी भावनाओं को जब अभिव्यक्त करता है, तो ख्याल की रचना होती है।’ ख्याल में स्वरों की स्थिरता और चपलता दोनों पर विशेष बल दिया जाता है और गमक का प्रयोग करते हैं।इसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है।

ख्याल के दो प्रकार होते हैं:—

विलम्बित अथवा बड़ा ख़्याल
द्रुत अथवा छोटा ख़्याल
यह कुछ मूलभूत अंतर थे ख्याल, ठुमरी और ध्रुपद में।

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