घायल वसंत - हरिशंकर परसाई
Submitted by vasna on 26 October 2018 - 8:27amकल बसंतोत्सव था। कवि वसंत के आगमन की सूचना पा रहा था -
प्रिय, फिर आया मादक वसंत।
मैंने सोचा, जिसे वसंत के आने का बोध भी अपनी तरफ से कराना पड़े, उस प्रिय से तो शत्रु अच्छा। ऐसे नासमझ को प्रकृति-विज्ञान पढ़ाएँगे या उससे प्यार करेंगे। मगर कवि को न जाने क्यों ऐसा बेवकूफ पसंद आता है ।
कवि मग्न होकर गा रहा था -
'प्रिय, फिर आया मादक वसंत !' Read More : घायल वसंत - हरिशंकर परसाई about घायल वसंत - हरिशंकर परसाई




